कुचामन सिटी. जयपुर स्थित दी बार एसोसिएशन ने पुलिस थाना चितावा, जिला डीडवाना-कुचामन के प्रकरण संख्या 95/2026 में अधिवक्ता रमेश सोहू एवं मनोज लोरा के विरुद्ध की जा रही संभावित कार्यवाही पर गंभीर चिंता व्यक्त करते हुए पुलिस अधीक्षक, डीडवाना-कुचामन को ज्ञापन प्रेषित किया है।


एसोसिएशन ने कहा है कि संबंधित घटनाक्रम के दौरान दोनों अधिवक्ता अपने मुवक्किल के विधिक प्रतिनिधि के रूप में उपस्थित थे तथा उन्हें विधिक सहायता एवं परामर्श प्रदान कर रहे थे। केवल इस आधार पर कि कोई अधिवक्ता अपने मुवक्किल के हितों की रक्षा कर रहा है, उसके विरुद्ध आपराधिक संलिप्तता का संदेह उत्पन्न करना न्याय व्यवस्था की मूल भावना के विपरीत है।

दी बार एसोसिएशन के अध्यक्ष सोमेश चन्द्र शर्मा एवं महासचिव उमेश चौधरी ने संयुक्त रूप से कहा कि अधिवक्ता न्याय प्रशासन प्रणाली के अभिन्न अंग हैं तथा किसी भी अधिवक्ता को उसके पेशेगत दायित्वों के निर्वहन के कारण प्रताड़ित करना अथवा अनावश्यक रूप से आपराधिक प्रकरणों में उलझाना स्वतंत्र वकालत एवं निष्पक्ष न्याय व्यवस्था के लिए घातक सिद्ध होगा। उन्होंने कहा कि अधिवक्ता अपने मुवक्किल को विधिक सहायता प्रदान करने के संवैधानिक दायित्व का निर्वहन करते हैं और इस कारण उन्हें संदेह की दृष्टि से नहीं देखा जा सकता।
विधिक सहायता को आपराधिक गतिविधि का आधार न बनाया जाए – बार संघ
एसोसिएशन ने अपने ज्ञापन में कहा है कि अधिवक्ताओं की भूमिका का मूल्यांकन केवल उपलब्ध स्वतंत्र एवं वस्तुनिष्ठ साक्ष्यों के आधार पर किया जाना चाहिए तथा उनके द्वारा अपने मुवक्किल को प्रदान की गई विधिक सहायता को किसी भी प्रकार से आपराधिक गतिविधि का आधार नहीं बनाया जाना चाहिए। ज्ञापन में यह भी कहा गया है कि किसी भी कार्यवाही को पूर्णतः निष्पक्ष, पारदर्शी, विधि सम्मत तथा प्राकृतिक न्याय के सिद्धांतों के अनुरूप संचालित किया जाना चाहिए।

अध्यक्ष सोमेश चन्द्र शर्मा एवं महासचिव उमेश चौधरी ने जिला पुलिस प्रशासन से अपेक्षा व्यक्त की है कि अधिवक्ता रमेश सोहू एवं मनोज लोरा के संबंध में किसी भी प्रकार की जांच अथवा कार्यवाही करते समय विधि के शासन, न्याय एवं निष्पक्षता के उच्च मानकों का पालन किया जाएगा तथा अधिवक्ताओं की पेशेगत स्वतंत्रता, गरिमा एवं सुरक्षा सुनिश्चित की जाएगी।
दी बार एसोसिएशन ने विश्वास व्यक्त किया है कि जिला पुलिस प्रशासन तथ्यों एवं साक्ष्यों के आधार पर निष्पक्ष निर्णय लेते हुए न्याय व्यवस्था में अधिवक्ताओं की महत्वपूर्ण भूमिका का सम्मान करेगा तथा ऐसी कोई कार्रवाई नहीं करेगा जिससे अधिवक्ता समुदाय में अनावश्यक असंतोष उत्पन्न हो या न्यायिक संस्थाओं के प्रति विश्वास प्रभावित हो।
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