कुचामन सिटी के पुराने रोडवेज बस स्टैण्ड क्षेत्र में वर्षों पुरानी सीमेन्ट सड़क को तोड़कर नगर परिषद कोष से कराए जा रहे सड़क निर्माण कार्य में अनियमितताओं की विस्तृत जाँच की मांग उठी है।



नगर परिषद के निवर्तमान उपसभापति हेमराज चावला एवं नगर कांग्रेस अध्यक्ष सुतेन्द्र सारस्वत ने संयुक्त प्रेस विज्ञप्ति जारी कर कहा कि सामान्यतः विकास कार्य नागरिक सुविधाओं को ध्यान में रखकर किए जाते हैं। लेकिन वर्तमान सड़क निर्माण कार्यों में आमजन की सुविधा की अनदेखी की जा रही है।

उन्होंने बताया कि नगर परिषद द्वारा अप्रैल माह की शुरुआत में मुख्य बस स्टैण्ड सड़क निर्माण कार्य को 14 अप्रैल से पहले पूरा करने का आश्वासन दिया गया था, जिसका समाचार पत्रों में भी प्रकाशन हुआ था। इसके बावजूद डेढ़ माह बीत जाने के बाद भी सड़क निर्माण कार्य पूर्ण नहीं हो सका है। वहीं अब गोल प्याऊ क्षेत्र के शेष मुख्य मार्गों पर भी आगामी दिनों में सड़क निर्माण कार्य शुरू किए जाने की सूचना प्रकाशित कर दी गई है, जिससे आमजन में असंतोष बढ़ रहा है।
उन्होंने कहा कि सड़क निर्माण के नाम पर कस्बे के मुख्य मार्गों को एक साथ बंद कर दिया गया है, जिससे नागरिकों को भारी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। यदि कार्य को चरणबद्ध तरीके से, एक-एक हिस्से में किया जाता तो आमजन की दिक्कतें कम हो सकती थीं। लेकिन सभी सड़कों को एक साथ उखाड़कर रास्ते बंद करना अव्यवस्थित एवं अनियमिततापूर्ण कार्यप्रणाली को दर्शाता है।

एलएण्डटी कम्पनी से करवाया जाना चाहिए था सड़क निर्माण :-
प्रेस विज्ञप्ति में कहा गया कि कस्बे में पेयजल एवं सीवरेज योजना का कार्य अंतिम चरण में है। राज्य सरकार और एलएण्डटी कम्पनी के बीच हुए अनुबंध के अनुसार – सीवरेज एवं पेयजल लाइन डालने के दौरान क्षतिग्रस्त हुई सड़कों का पुनर्निर्माण पूर्ववत स्वरूप में एलएण्डटी कम्पनी द्वारा किया जाना निर्धारित है। योजना के तहत कस्बे में कई डामर एवं सीमेन्ट सड़कें पहले ही बनाई जा चुकी हैं।
उन्होंने आरोप लगाया कि पुराने बस स्टैण्ड से सियाराम लॉज तक डिवाइडर के दोनों ओर हो रहे सड़क निर्माण कार्य के लिए नगर परिषद द्वारा कोई निविदा जारी नहीं की गई है। ऐसे में यह कार्य किस योजना के अंतर्गत कराया जा रहा है, यह स्पष्ट नहीं है।
साथ ही बताया कि सुरजी देवी काबरा स्कूल से सियाराम लॉज तक डिवाइडर के पास स्थित सीमेन्ट सड़क पूर्व में एलएण्डटी कम्पनी द्वारा बनाई गई थी। यदि सड़क में कोई कमी थी तो उसका सुधार कार्य भी कम्पनी से ही करवाया जाना चाहिए था। इसके विपरीत नगर परिषद कोष से सड़क का पुनर्निर्माण करवाना अनुचित बताया गया है।
इसके अलावा सारडा कॉम्प्लेक्स के सामने स्थित सीमेन्ट सड़क लगभग एक वर्ष पूर्व नगर परिषद द्वारा बनवाई गई थी, जिसकी पांच वर्ष की गारंटी अवधि भी थी। समयपूर्व सड़क क्षतिग्रस्त होने पर संबंधित संवेदक के विरुद्ध नियमानुसार कार्रवाई कर उसी से सड़क का पुनर्निर्माण करवाया जाना चाहिए था, लेकिन नगर परिषद कोष से दोबारा निर्माण करवाना नियमों के विपरीत बताया गया है।
45 वार्डों के विकास कार्यों की प्रक्रिया पर भी सवाल :-
विज्ञप्ति में यह भी कहा गया कि नगर परिषद द्वारा पूर्व में 45 वार्डों में 50-50 लाख रुपए के विकास कार्यों के लिए निविदाएं जारी की गई थीं। नियमानुसार ये कार्य संबंधित वार्ड क्षेत्र में ही कराए जाने चाहिए। यदि किसी अन्य स्थान पर कार्य करवाना हो तो बोर्ड की स्वीकृति आवश्यक होती है जबकि ऐसी किसी स्वीकृति की जानकारी नहीं है।
हेमराज चावला एवं सुतेन्द्र सारस्वत ने आरोप लगाया कि इन कार्यों में निविदाओं से जुड़े कुछ लोगों की व्यक्तिगत रुचि एवं भूमिका संदिग्ध प्रतीत होती है। उन्होंने सम्पूर्ण सड़क निर्माण कार्यों में व्याप्त अनियमितताओं की निष्पक्ष जाँच कर दोषियों के विरुद्ध सख्त कार्रवाई की मांग की है।
साथ ही चेतावनी दी कि सड़क निर्माण के नाम पर पिछले डेढ़ माह से बंद पड़े मुख्य रास्तों को शीघ्र नहीं खोला गया तो प्रशासन को जनविरोध का सामना करना पड़ सकता है।
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