Monday, April 20, 2026
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कुचामन नगर परिषद में बजट की भारी कमी के बीच करोड़ों के टेंडर जारी, पार्षदों ने उठाए सवाल

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कुचामन नगर परिषद में वित्तीय कुप्रबंधन को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। परिषद द्वारा 45 वार्डों के लिए करोड़ों रुपए के टेंडर जारी किए जाने के बाद पार्षदों ने गंभीर सवाल उठाए हैं।

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आरोप है कि जब परिषद के पास बकाया भुगतानों के लिए भी पर्याप्त बजट उपलब्ध नहीं है, तब इतनी बड़ी राशि के टेंडर जारी करना न केवल अव्यवहारिक है, बल्कि वित्तीय अनुशासन के विरुद्ध भी माना जा रहा है।

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बकाया भुगतान लंबित, परिषद वित्तीय संकट में

सूत्रों के अनुसार – नगर परिषद पिछले कई महीनों से बजट संकट से जूझ रही है। कई ठेकेदारों को उनके निर्माण कार्यों का भुगतान लंबे समय से नहीं हुए हैं। परिषद कर्मचारियों के वेतन-भत्तों में भी देरी जारी है।

ठेकेदारों की जमा धरोहर राशि (EMD) तक समय पर वापस नहीं की जा रही। ऐसे हालात में करोड़ों रुपए के नए टेंडर जारी होना परिषद की कार्यशैली पर प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

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आरयूआईडीपी की परियोजनाएं पहले से चल रही

शहर में आरयूआईडीपी (RUIDP) द्वारा सीवरेज और जलापूर्ति योजना के तहत बड़े पैमाने पर सड़क निर्माण एवं अन्य विकास कार्य पहले से ही जारी हैं। अधिकांश क्षेत्रों में सड़कें पुनर्निर्मित हो चुकी हैं और शेष कार्य भी प्रगति पर है। ऐसे में नगर परिषद द्वारा फिर से करोड़ों रुपए के टेंडर एक साथ निकालना कई पार्षदों को समझ से परे लग रहा है।

वित्तीय अनुशासन टूटा हुआ है – परिषद कर्मचारी

परिषद के एक कर्मचारी ने नाम न छापने की शर्त पर बताया कि परिषद के पास पर्याप्त निधि नहीं है, फिर भी बड़े-बड़े टेंडर जारी किए जा रहे हैं। यह स्पष्ट रूप से वित्तीय अनुशासन के खिलाफ है।

उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि 10 लाख रुपए तक के छोटे ठेकों को स्टोर सेक्शन के माध्यम से गुपचुप तरीके से स्वीकृत किया जा रहा है। जिससे प्रक्रिया की पारदर्शिता पर सवाल उठ रहे हैं।

दलाली और कमीशन-खोरी के आरोप भी सामने आए

कई पार्षदों ने आरोप लगाया कि परिषद में एक छुटभैया ठेकेदार ठेकों में दलाली कर रहा है और कमीशन के बदले नए ठेके दिलवाने का दावा करता है। कुछ ठेकेदारों से फिशिंग और वसूली जैसी शिकायतें भी सामने आई हैं।

पार्षदों का कहना है कि यदि यह सही है तो यह विकास कार्यों की विश्वसनीयता को गंभीर रूप से प्रभावित करता है।

पारदर्शिता और वित्तीय सुधारों की मांग

पार्षदों का कहना है कि परिषद को सबसे पहले –
• लंबित बकाया भुगतान साफ करने,
• वित्तीय प्रबंधन मजबूत करने,
• और टेंडर प्रक्रिया को पूरी पारदर्शिता के साथ संचालित करने की जरूरत है।

एक पार्षद ने कहा कि जब तक वित्तीय अव्यवस्था दूर नहीं होगी और भुगतान प्रक्रिया समय पर नहीं होगी, तब तक विकास कार्यों की गति प्रभावित होती रहेगी। परिषद को अपनी प्राथमिकताएं स्पष्ट करनी होंगी।

शहरवासियों में भी बढ़ी चिंता

स्थानीय नागरिकों का कहना है कि लगातार चल रहे विवादों और भुगतान संकट के कारण कई विकास कार्य अधर में लटके हुए हैं। परिषद में हो रही अनियमितताओं की पारदर्शी जांच की मांग भी उठने लगी है।

कुचामन नगर परिषद में बजट-अभाव के बीच करोड़ों के टेंडर जारी होने का मामला फिलहाल चर्चा का विषय बना हुआ है। अब देखना होगा कि परिषद इन आरोपों और वित्तीय सवालों पर क्या स्पष्टीकरण देती है और शहर के विकास को पटरी पर लाने के लिए क्या कदम उठाती है।

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