Sunday, March 29, 2026
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नावां में सोलर प्लांट का काम शुरू होते ही जोरदार विरोध, मांगों पर अड़े ग्रामीण

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नावां शहर. बीहड़ क्षेत्र में लग रहे सोलर प्लांट को लेकर बढ़ते विवाद ने गुरुवार को नया मोड़ ले लिया। पेड़ों की कटाई और रास्तों के बंद होने के विरोध में ग्रामीणों का आक्रोश एक बार फिर फूट पड़ा। प्रशासन की मौजूदगी में काम शुरू करवाने की कोशिश होते ही बड़ी संख्या में लोग मौके पर जुट गए और विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया।

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गुरुवार को तहसीलदार रामेश्वर गढ़वाल और थानाधिकारी नंदलाल चौधरी पुलिस जाप्ते के साथ बीहड़ क्षेत्र पहुंचे, जहां वे कंपनी का रुका हुआ काम दोबारा शुरू करवाने आए थे। जैसे ही मशीनें आगे बढ़ने लगीं आसपास के गांवों से ग्रामीण और महिलाएं बड़ी संख्या में वहां पहुंच गईं।

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महिलाओं ने आगे बढ़कर नारे लगाए – पेड़ बचाओ, बीहड़ बचाओ और रास्ता जाम कर दिया। इसी दौरान पुलिस जाप्ते ने लोगों को हटाने के लिए लाठियों के सहारे दबाव बनाने की कोशिश की लेकिन ग्रामीण डटकर खड़े रहे।

स्थिति तनावपूर्ण हो गई, महिलाओं और पुलिस के बीच तकरार भी हुई। ग्रामीणों ने आरोप लगाया कि प्रशासन कंपनी के पक्ष में काम कर रहा है और खेजड़ी सहित सैकड़ों पेड़ों को बचाने की उनकी आवाज अनसुनी की जा रही है। विरोध बढ़ता देख अधिकारी मौके पर रुके रहे, लेकिन काम आगे नहीं बढ़ पाया।

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वीडियो –

पूरा मामला –

बीहड़ इलाके में लगभग 450 करोड़ रुपए के प्रस्तावित सोलर प्लांट के लिए भूमि तैयार की जा रही है। स्थानीय लोगों का आरोप है कि इस प्रक्रिया में सैकड़ों खेजड़ी और अन्य पेड़ों को जड़ से उखाड़ दिया गया है।

यह क्षेत्र वर्षों से –

  • गौवंश का आश्रय स्थल,
  • पक्षियों का प्राकृतिक आवास,
  • किसानों की खेतों तक पहुंच का रास्ता,
  • और मंदिर तक जाने का पारंपरिक मार्ग रहा है।

लोगों का कहना है कि सोलर प्लांट कंपनी चरागाह और पारंपरिक रास्तों को बंद करने की कोशिश कर रही है, जिससे स्थानीय ग्रामीणों की आजीविका और पर्यावरण दोनों पर खतरा पैदा हो गया है।

बीते दिनों महिलाओं ने स्थल पर पहुंचकर पेड़ों को गले लगाकर प्रदर्शन किया था, वहीं तहसीलदार के विरोध के दौरान भीड़ ने उनके वाहन की हवा निकाल दी थी। इसके बाद एसडीएम दिव्या सोनी की मौजूदगी में बैठक आयोजित हुई, लेकिन ग्रामीणों और कंपनी के बीच किसी भी मुद्दे पर सहमति नहीं बन पाई।

गुरुवार को काम दोबारा शुरू करने का प्रयास विफल होने के बाद ग्रामीणों ने फिर चेतावनी दी है कि यदि उनकी मांगों – चरागाह की सुरक्षा, पारंपरिक मार्ग की उपलब्धता और पेड़ों की कटाई पर रोक का समाधान नहीं हुआ, तो आंदोलन और तेज किया जाएगा।

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