कुचामन नगरपरिषद के सभापति पद को लेकर चल रहे विवाद पर सुप्रीम कोर्ट ने शुक्रवार को बड़ा फैसला सुनाया।


अदालत ने पूर्व सभापति आसिफ खान की ओर से दायर विशेष अनुमति याचिका (SLP) पर सुनवाई से इंकार करते हुए उसे खारिज कर दिया।

यह मामला राजस्थान उच्च न्यायालय जोधपुर की डिवीजन बेंच के उस आदेश से जुड़ा है, जिसमें अदालत ने सिंगल बेंच द्वारा दिए गए स्टे आदेश को हटाया था। सिंगल बेंच ने पहले आसिफ खान के पक्ष में रोक लगाई थी, जिससे वे पद पर बने हुए थे। लेकिन डिवीजन बेंच ने वह रोक हटाते हुए स्वायत्त शासन विभाग के आदेश को बहाल किया, जिसके तहत सुरेश सिखवाल को कुचामन नगरपरिषद का सभापति बनाया गया।


आसिफ खान ने इस आदेश को चुनौती देते हुए सुप्रीम कोर्ट में याचिका दायर की थी। सुप्रीम कोर्ट ने 7 नवंबर 2025 को दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद कहा कि यह मामला विशेष अनुमति के दायरे में नहीं आता। अदालत ने कहा कि याचिकाकर्ता चाहें तो अन्य वैधानिक उपायों के तहत राहत मांग सकते हैं।
सुप्रीम कोर्ट के इस आदेश के बाद अब कुचामन नगरपरिषद में सुरेश सिखवाल सभापति पद पर बने रहेंगे, जबकि आसिफ खान को फिलहाल कोई राहत नहीं मिली है।
इस पूरे प्रकरण में केबिनेट मंत्री झाबरसिंह खर्रा, राजस्व विभाग मंत्री विजय सिंह चौधरी, तथा जोधपुर हाईकोर्ट के अधिवक्ता राजेश पंवार, मोनाल चुंग, आयुष गहलोत और कमिश्नर का विशेष योगदान रहा।






