कुचामन सिटी. राजस्थान सरकार पर्यावरण एवं जलवायु परिवर्तन विभाग के आदेशानुसार सांभर झील क्षेत्र में “एवियन बोटुलिज्म” (Avian Botulism) से संबंधित बीमारियों की रोकथाम, जागरूकता एवं पूर्व तैयारी के उद्देश्य से एक दिवसीय संवेदनशीलता कार्यशाला (Sensitization Workshop) का आयोजन सोमवार को नगर परिषद सभा भवन, कुचामन सिटी में किया गया।


कार्यशाला का आयोजन सहायक वन संरक्षक परबतसर आकांक्षा गोठवाल की अध्यक्षता में हुआ। कार्यक्रम में उप वन संरक्षक, नागौर विजय शंकर पाण्डे, इकॉलॉजिस्ट टी.के. रॉय, एडीएम कुचामन सिटी राकेश कुमार गुप्ता, उपखंड अधिकारी नावां विश्वामित्र मीणा, तहसीलदार नावां रामेश्वरलाल गढ़वाल, अधिशाषी अधिकारी नावां शिकेश कांकरिया, तथा एनजीओ “होप एंड बियॉन्ड” से प्रणय सिंह एवं विजय जांगिड़ ने सहभागिता की।

इसके अतिरिक्त बर्ड वॉचर एवं वाइल्डलाइफ बायोलॉजिस्ट आबिद अली, वरिष्ठ पशु चिकित्सक नावां डॉ. मोतीलाल, विद्युत विभाग एक्सईएन श्रवण कुमार, एईई तेजाराम मुद्गल, डॉ. विवेक सिंह (एडी एएचडी), एपी डीआईटीसी समेत विभिन्न विभागों के अधिकारी व प्रतिनिधि उपस्थित रहे।
कार्यशाला में एवियन बोटुलिज्म के कारण, लक्षण, बचाव और त्वरित कार्रवाई की प्रक्रियाओं पर विशेषज्ञों ने विस्तृत जानकारी दी।

इस अवसर पर क्षेत्रीय वन अधिकारी राजूराम सहित वन विभाग रेंज कुचामन सिटी का पूरा स्टाफ मौजूद रहा।
बता दें कि वर्ष 2019 में “एवियन बोटुलिज्म” बीमारी ने सांभर झील में भारी तबाही मचाई थी। उस समय रेस्क्यू सेंटर की कमी, वैक्सीन का अभाव और प्रशासनिक व्यवस्थाओं की कमियों के चलते लगभग 25,000 से अधिक पक्षियों की मौत हो गई थी।
इसके बाद अक्टूबर 2024 में भी इसी बीमारी के चलते 100 से अधिक पक्षियों की मौत के मामले सामने आए थे। सांभर झील के पारिस्थितिकी तंत्र में नॉर्दर्न शावलर, स्क्वील सहित कई प्रजातियों के दुर्लभ पक्षी पाए जाते हैं।
नावां शहर/कुचामन न्यूज: सांभर झील में एक बार फिर पक्षियों की जान पर खतरा, कई पक्षियों की मौत






