Thursday, May 7, 2026
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कुचामन में बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे वाहन, हत्या और अपहरण के बाद भी पुलिस सो रही

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डीडवाना-कुचामन जिले के प्रमुख शहर कुचामन में यातायात नियमों का खुला उल्लंघन अब एक खतरनाक चलन बन चुका है।

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बिना नंबर प्लेट के वाहन सड़कों पर घूम रहे हैं, तेज रफ्तार वाली बाइकें मोडिफाइड साइलेंसरों से शोर मचा रही हैं और हेलमेट-सीट बेल्ट का तो जैसे नामोनिशान ही मिट चुका है। यह न सिर्फ आम राहगीरों की जान जोखिम में डाल रहा है, बल्कि प्रशासन की व्यवस्था पर भी गंभीर सवाल खड़ा कर रहा है।

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कुचामन में हाल ही में हुई व्यापारी रमेश रूलानिया की हत्या के बाद वैसे ही डर का माहौल है। उस घटना में जिस स्कॉर्पियो में व्यापारी की हत्या करने आए थे उस पर भी नंबर प्लेट नहीं थी। बावजूद इसके आरोपियों गणपत, धर्मेंद्र, महेश और जुबेर ने कुचामन में प्रवेश किया और गणपत ने व्यापारी को गोली मारकर हत्या कर दी। आरोपी उसी स्कॉर्पियो से फरार हो गए। इस घटना से पुलिस की नाकामी स्पष्ट हो रही है। शहर में बिना नंबर प्लेट की गाड़ियों पर अब तक कोई प्रभावी कार्रवाई नहीं हुई है, जो चिंता का विषय है।

रमेश रूलानिया हत्या में प्रयुक्त स्कॉर्पियो।

बिना नंबर प्लेट के दौड़ रहे वाहन, बेटियां कैसे सुरक्षित

कुचामन सिटी जो शिक्षा नगरी के नाम से प्रसिद्ध है। रोजाना हजारों छात्र-छात्राएं कोचिंग क्लासेस के लिए आते हैं। कई बार क्लास देर रात तक चलती हैं, और तब बिना पहचान वाले रिक्शा-टैक्सी सड़कों पर घूमते नजर आते हैं।

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एक मां कहती हैं कि सुबह 6 बजे कोचिंग गई बेटी जब रात 9 बजे घर लौटती है, तो उन्हें हमेशा डर रहता है कि क्या वह सुरक्षित होगी। सवाल यह उठता है कि नागरिकों की सुरक्षा की जिम्मेदारी किसकी है- क्या पुलिस विभाग अपनी जिम्मेदारी निभा पा रहा है? जवाब साफ है – बिलकुल नहीं।

पुलिस की लापरवाही की वजह से बिना नंबर वाले रिक्शे में सवार होना मजबूरी बन गया है, लेकिन डर बना रहता है। ऐसे वाहनों की संख्या इतनी बढ़ गई है कि रिक्शे में स्पष्ट नंबर प्लेट वाले वाहन मुश्किल से दिखाई देते हैं। प्राइवेट कारें और बाइकें भी बिना नंबर के दौड़ रही हैं।

पुराने बस स्टैंड पर घूमती बना नंबर प्लेट की कार।

आए दिन घटनाएं होती हैं, जहां वाहन चालकों की लापरवाही से एक्सीडेंट होते हैं। इसके अलावा, लड़कियों से छेड़छाड़ और अपहरण की घटनाएं भी बढ़ रही हैं जो कुचामन की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती हैं।

कई महीने बाद मिली उर्मिला – 

घटना 27 अगस्त की है। जब घर से प्रसाद लेने निकली नाबालिग उर्मिला कुमावत को कुछ बदमाश कार में अपहरण कर फरार हो गए। परिजन और समाज बस पुलिस से गुहार लगाते रह गए, लेकिन बाद में डेढ़ महीने बाद बच्ची मिली। ऐसे में माता-पिता की सुरक्षा की भावना कैसे बनी रहे?

एसपी से सवाल – सड़कों पर कब होगी बच्चियां सुरक्षित

महिला सुरक्षा के लिए एसपी ऋचा तोमर के निर्देश पर 19 से 27 अक्टूबर तक विशेष अभियान चलाया गया। महिला पुलिस टीमों ने होटल, कैफे, जिम और दुकानों का निरीक्षण किया और कर्मचारियों का वेरिफिकेशन किया। लेकिन सड़कों पर उतनी ही सख्ती क्यों नहीं दिखाई गई? शहर की महिलाएं सवाल उठा रही हैं कि प्रतिष्ठानों की चेकिंग ठीक है, लेकिन पब्लिक ट्रांसपोर्ट और सड़क सुरक्षा कब सुनिश्चित होगी?

पुलिस के सामने ट्रैफिक नियमों की अनदेखी

आए दिन सड़क हादसों में लोगों की मौत होती है। बिना हेलमेट और सीट बेल्ट के वाहन चालकों की संख्या अधिक है।

कुचामन की सड़कों पर तेज आवाज वाले हूटर, मोडिफाइड साइलेंसर और ब्लैक फिल्म वाले शीशे अब आम हो गए हैं। रात के समय मोहल्लों में बाइक गैंग्स शोर मचाते घूमते हैं, जिससे आम लोगों की परेशानी बढ़ रही है। गलियों में तेज रफ्तार से गाड़ियां दौड़ना आम बात बन चुकी है। कई बार पुलिस के सामने ये सब होता है लेकिन पुलिस बस मूकदर्शक बनकर बैठी रहती है।

ट्रैफिक पुलिस की कमी कुचामन की बड़ी समस्या – एसपी ऋचा तोमर ने स्वीकार किया कि नया जिला होने के कारण स्टाफ की कमी है और जनता से सहयोग की अपील की। हालांकि नए ट्रैफिक नियम (1 मार्च 2025 से लागू) के तहत बिना नंबर प्लेट पर 10,000 रुपये तक जुर्माना, ओवरस्पीड पर 5,000 रुपये, और बिना हेलमेट पर 1,000 रुपये का प्रावधान है। फिर भी कुचामन में चालान कटने की संख्या नगण्य है।

यह बात पहले भी कई बार उठाई जा चुकी है। Kuchamadi News ने एक खबर में बताया था कि पूरे शहर की ट्रैफिक व्यवस्था केवल चार-पाँच पुलिस कर्मियों के कंधों पर है, जिससे पूरे शहर में सही तरीके से व्यवस्था नहीं हो पा रही है। शहर में एक लायन सर्कल के अलावा कहीं भी ट्रैफिक पुलिस दिखाई नहीं देती, और सर्किल पर भी कभी-कभार ही नजर आती है।

व्यापारियों में हत्या के बाद धमकियां बढ़ गई हैं। आए दिन किसी न किसी व्यापारी को धमकी मिल रही है। बिना नंबर वाली गाड़ियां अपराधियों को ढाल बन जाती हैं। पुलिस को विस्तृत अभियान चलाना चाहिए—सीसीटीवी बढ़ाएं, चेकपोस्ट लगाएं और नियम तोड़ने वालों पर तुरंत कार्रवाई करें।

उदयपुर पुलिस से सीख – 

4 अक्टूबर को उदयपुर पुलिस अधीक्षक योगेश गोयल ने घोषणा की कि शहर में चल रहे करीब 3,000 ऑटो रिक्शा में मालिक का नाम, वाहन संख्या, चालक का मोबाइल नंबर और पुलिस हेल्पलाइन नंबर जैसी जानकारी स्टिकर पर स्पष्ट रूप से प्रदर्शित की जाएगी। सभी ऑटो चालकों और मालिकों को अपनी वाहन जानकारी यातायात कार्यालय में जमा करनी होगी। जिन ऑटो स्वामियों ने अब तक जानकारी प्रस्तुत नहीं की, उन्हें शीघ्रता से जमा कराने के निर्देश दिए गए।

कुचामन में भी शिक्षा नगरी होने के कारण रोज आसपास के गांव और शहरों से छात्र पढ़ने आते हैं। यहां भी ऐसी व्यवस्था लागू की जानी चाहिए, जिससे छात्राओं और महिलाओं को बिना नंबर प्लेट या बिना चालक जानकारी के वाहनों में बैठना असुरक्षित न लगे।

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