कुचामन सिटी. मानसून की फिर से सक्रियता ने किसानों को भारी नुकसान पहुंचाया है। कुचामन सहित आसपास के ग्रामीण अंचल में पिछले दस दिनों से लगातार हो रही बारिश के कारण किसानों की चिंता बढ़ गई है।


खेतों में खड़ी बाजरा, मूंग, मोठ जैसी फसलें नष्ट होने के कगार पर हैं। लगातार बारिश के चलते किसानों की उम्मीदों पर पानी फिर गया है। खेतों में पानी भरने से फसलों को भारी नुकसान हो रहा है। किसान अपनी मेहनत बचाने के लिए हर संभव प्रयास कर रहे हैं लेकिन मौसम की मार से राहत मिलती नहीं दिख रही।

खेतों में पीली पड़ने लगी फसल
किसान परसाराम बुगालिया ने बताया कि लगातार बारिश का असर अब साफ दिखने लगा है। शुरू में फसलें अच्छी थीं। लेकिन पिछले 10-12 दिनों से रोजाना हो रही बरसात के कारण फसलें पीली पड़ने लगी हैं और बर्बाद होने की आशंका बढ़ गई है। खेतों में खड़ी फसल गलने के कगार पर है। हवा और बारिश से बाजरे की खड़ी फसल तिरछी होकर गिर गई है। वहीं पककर तैयार फसल की कटाई भी अटकी हुई है। किसानों को आशंका है कि यदि मौसम यूं ही खराब रहा तो पके हुए बाजरे में अंकुरण शुरू हो जाएगा, जिससे उत्पादन पर बड़ा असर पड़ेगा।
किसानों ने की मुआवजे की मांग
किसानों ने प्रशासन और कृषि विभाग से तुरंत सर्वे कराकर नुकसान का आकलन करने और उचित मुआवजा दिलाने की मांग की है।

किसानों का कहना है कि अगर बारिश का सिलसिला बंद नहीं हुआ तो इस सीजन की मेहनत पूरी तरह बर्बाद हो जाएगी। लंबे समय बाद हुई लगातार बारिश से खरीफ फसलें चौपट हो गई हैं। किसानों का कहना है कि यदि समय पर गिरदावरी की जाए तो उन्हें बीमा क्लेम से राहत मिल सकती है।

आज विधानसभा में भी गूंजा मुद्दा
आज गुरुवार विधानसभा में भी खराब फसलों का मुद्दा गूंजा। नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली के नेतृत्व में कांग्रेस विधायकों ने खराब फसल हाथ में लेकर ट्रैक्टर पर सवार होकर विधानसभा पहुंचकर विरोध जताया। सदन में जमकर नारेबाजी भी हुई।
इस दौरान कृषि मंत्री किरोड़ीलाल मीणा ने सदन में किसानों को उचित मुआवजा दिलाने का आश्वासन दिया। उन्होंने भारी बारिश से हुए नुकसान के आंकड़े भी पेश किए –
- जनहानि: 193 लोगों की मौत, 36 लोग घायल।
- पशुधन हानि: 347 छोटे पशु और 279 बड़े पशु मरे।
- आवासीय नुकसान: 1974 पक्के मकान, 752 कच्चे मकान और 190 झोपड़े गिरे।
- अन्य नुकसान: 517 पशु बाड़ों को क्षति, 3522 परिवारों के बर्तन नष्ट, 2855 परिवारों के कपड़े बर्बाद।






