नावां से खाखड़की गांव को जोड़ने वाला मुख्य मार्ग पूरी तरह क्षतिग्रस्त हो चुका है, और अब यह जर्जर सड़क एक नवजात की मौत का कारण बन गई।


गुरुवार को ग्राम खाखड़की की एक महिला को प्रसव पीड़ा शुरू होने पर परिजनों ने 108 एम्बुलेंस को सूचना दी। लेकिन खस्ताहाल सड़क के चलते 12 किलोमीटर की दूरी तय करने में एम्बुलेंस को करीब 40 मिनट लग गए।


एम्बुलेंस में ही कराना पड़ा प्रसव
रास्ते में ही महिला की स्थिति अत्यधिक बिगड़ गई, लेकिन 108 एम्बुलेंस में मौजूद नर्सिंग स्टाफ की सूझबूझ और तत्परता से एम्बुलेंस में ही सुरक्षित प्रसव कराया गया। महिला ने एक पुत्र को जन्म दिया।
प्राप्त जानकारी के अनुसार- विमला उर्फ दीपी पत्नी रमेश बावरी निवासी खाखड़की को नावां उपजिला चिकित्सालय ले जाया जा रहा था। एम्बुलेंस में नर्सिंग स्टाफ ललित तंवर और चालक मदन धायल मौजूद थे। जब रास्ते में विमला की हालत ज्यादा बिगड़ी, तो दोनों ने एम्बुलेंस को सुरक्षित स्थान पर रोककर सड़क पर ही प्रसव करवाया।

जन्म के कुछ घंटे बाद नवजात की मृत्यु
हालांकि जन्म के तुरंत बाद नवजात की हालत गंभीर बनी रही। नावां अस्पताल में प्राथमिक इलाज के बाद उसे कुचामन रेफर किया गया, लेकिन दुर्भाग्य से इलाज के दौरान शिशु की मृत्यु हो गई।
वीडियो में देखिए परिजन क्या बोले…
क्षेत्रवासी बोले: सड़क बनती तो बच सकती थी जान
इस घटना ने क्षेत्र में जर्जर सड़कों और आपात सेवाओं की बदहाली की पोल खोलकर रख दी है। ग्रामीणों का कहना है कि इस मार्ग की स्थिति वर्षों से खराब है, लेकिन जिम्मेदार विभाग आंख मूंदे बैठे हैं। अगर सड़क सही होती, तो समय पर अस्पताल पहुंचा जा सकता था और शायद नवजात की जान बच जाती।
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