Wednesday, April 29, 2026
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कुचामन सिटी: कूड़े-कचरे में भोजन तलाशने को मजबूर कान्हा की गाय, कार्यदायी संस्था और प्रशासन मौन

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कुचामन सिटी. कान्हा की गाय सड़कों व गलियों में पड़े कूड़े में भोजन तलाशने को मजबूर है। सैंकड़ों की संख्या में गौवंश अपना पेट भरने के लिए दर-दर की ठोकरें खाते फिरते दिखाई देते हैं।

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लेकिन ना तो प्रशासन का इस ओर कोई ध्यान है और न ही किसी कार्यदायी संस्था का। कान्हा की परम प्रिय गायें शासन-प्रशासन की बेरुखी के कारण हर दिन बदहाल स्थिति में होती जा रही हैं। जहां गौवंशों को अब चारे के लिए कूड़ेदानों का सहारा लेना पड़ रहा है तो वहीं गायों के हक में लड़ाई लड़ने वाले ठेकेदारों का भी गायों के प्रति ध्यान नहीं है।

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इसे लेकर अब स्थानीय लोगों ने कस्बे व गांवों में बेसहारा घूम रही गायों को गौशाला में पहुंचाने की मांग की है। भले ही तमाम गौशालाएं खोली गईं लेकिन गायों को उनका हक आज भी नहीं मिल सका है। कुछ ऐसा ही नजारा शनिवार को कृष्ण जन्माष्टमी पर शिक्षा नगरी कुचामन सिटी में देखने को मिला।

नगर परिषद द्वारा डाले गए रिंग रोड पर कचरे में चारा खोज रही थीं। जन्माष्टमी का पर्व बड़े हर्षोल्लास के साथ मनाया जा रहा है लेकिन कान्हा की प्यारी गाय आज भी दर-दर की ठोकरें खा रही हैं।

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भगतसिंह यूथ ब्रिगेड के प्रदेशाध्यक्ष एवं विश्व जाट महासभा के प्रदेश उपाध्यक्ष परसाराम बुगालिया अपनी टीम के साथी बिरमाराम बांगड़वा और अजय, विजय बिजारणिया के साथ सड़कों पर गौ माता को पॉलिथिन खाते और भटकते देखकर वेदना से भर उठे और कचरा खाती गायों को दूर हटाया।

लेकिन भूखी-प्यासी गाय कब तक रहेगी? उनका कहना है कि हम एक तरफ तो गायों को पूजते हैं और दूसरी तरफ यही गाय अपना पेट भरने के लिए दर-दर की ठोकरें खा रही हैं। हमारा जन्माष्टमी का पर्व तभी सफल होगा जब हम गायों को पूरी तरह अपनी जिंदगी में अपना लेंगे।

लोगों से अपील करते हुए उन्होंने कहा कि जो गोपालक हैं, वे अपनी गायों को केवल दूध निकालने के लिए ही अपने पास न रखें। जैसे वे दूध पीते हैं वैसे ही हर वक्त उनका ख्याल रखें। बुगालिया का यह भी कहना है कि कस्बे में गायों के लिए गौचारण की कई एकड़ जमीन है, लेकिन इसके बावजूद भी गायें बेसहारा हो चुकी हैं।

ना तो उनके रहने की व्यवस्था है और ना ही खाने की, जिसके कारण गायें अपनी भूख मिटाने के लिए कूड़े के ढेर में भोजन की तलाश में लगी रहती हैं। इन लोगों ने कस्बा व गांवों में बेसहारा घूम रही गायों को गौशाला में पहुंचाने की मांग की है।

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