नावां शहर (डीडवाना कुचामन जिला) में हरे-भरे पेड़ों की अंधाधुंध कटाई से पर्यावरण को गहरा नुकसान हो रहा है। अखेपुरा ग्राम की सार्वजनिक नाड़ी में असामाजिक तत्व खुलेआम खेजड़ी, बबूल सहित कई प्रजातियों के हरे पेड़ों को काटकर अवैध व्यापार में लिप्त हैं।


स्थानीय प्रशासन को कई बार सूचना देने के बावजूद कार्रवाई न होने से ग्रामीणों में रोष है।

ग्रामीणों ने बताया कि एक तरफ सरकार हरियालो राजस्थान अभियान के तहत नए पेड़ लगाकर हरियाली बढ़ाने का दावा कर रही है, वहीं दूसरी ओर वन विभाग की नाक के नीचे से पेड़ों की अवैध कटाई धड़ल्ले से जारी है। कटे हुए पेड़ों को ट्रैक्टर-ट्रॉलियों के माध्यम से बाहर भेजा जा रहा है।


प्रशासन को सूचना, कार्रवाई शून्य
पर्यावरण प्रेमी श्योदन राम ने बताया कि गांव के ही कुछ लोग सार्वजनिक तलाई से हरे पेड़ कटवा रहे हैं। इस संबंध में नावां तहसीलदार, पटवारी और मारोठ पुलिस को सूचना दी गई, लेकिन अब तक कोई ठोस कार्रवाई नहीं की गई। इसके बाद तहसीलदार को एक लिखित पत्र सौंपकर आरोपियों पर कानूनी कार्यवाही की मांग की गई है।

नावां में पहले भी कट चुके हैं 10,000 से अधिक पेड़
यह पहली बार नहीं है जब नावां में हरे पेड़ों का सफाया हुआ हो। इससे पहले भी यहां 10,000 से अधिक पेड़ों की कटाई की जा चुकी है। सरकार ने नावां क्षेत्र में 100 करोड़ रुपए की लागत से 100 मेगावाट का सोलर प्रोजेक्ट एसजेवीएनएल कंपनी को आवंटित किया था। इस परियोजना के लिए बीहड़ क्षेत्र की करीब 968 बीघा भूमि में मौजूद खेजड़ी और अन्य पेड़ों को काटा और उखाड़ा गया।
खेजड़ी को सबसे अधिक नुकसान
विशेषज्ञों का कहना है कि खेजड़ी का पेड़ थार मरुस्थल के पारिस्थितिक संतुलन के लिए अत्यंत महत्वपूर्ण है। यह न केवल रेगिस्तानी क्षेत्रों में मिट्टी के कटाव को रोकता है बल्कि पशुओं के चारे और ऑक्सीजन का भी बड़ा स्रोत है। इतनी बड़ी संख्या में खेजड़ी के पेड़ों की कटाई से स्थानीय जैव विविधता पर गंभीर असर पड़ेगा।
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