Monday, March 30, 2026
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नाबालिगों से जुड़े प्रकरणों पर डीडवाना कुचामन एसपी ऋचा तोमर और बाल कल्याण समिति अध्यक्ष ने की समीक्षा बैठक

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डीडवाना-कुचामन: जिला पुलिस अधीक्षक ऋचा तोमर (आई.पी.एस.) से शुक्रवार को कार्यालय में बाल कल्याण समिति, न्यायपीठ नागौर के अध्यक्ष मनोज सोनी ने मुलाकात की।

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उक्त मीटिंग में जिले में नाबालिग बच्चों से जुड़े प्रकरणों की गहन समीक्षा की गई। बैठक में बाल श्रम, पोक्सो एक्ट, परित्यक्त शिशुओं, बालकों के पुनर्वास एवं सामाजिक स्थिति जैसे विषयों पर विस्तार से चर्चा हुई। थाना स्तर से प्राप्त सामाजिक जाँच रिपोर्टों पर भी विचार-विमर्श किया गया।

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पुलिस अधीक्षक ने कहा कि नाबालिगों से जुड़े सभी प्रकरण अति संवेदनशील होते हैं, इसलिए पुलिस, अभिभावकों और अन्य संबंधित विभागों को गंभीरता से कार्य करना चाहिए। बच्चों का पुनर्वास, मानसिक सहयोग और मुख्यधारा में वापसी सुनिश्चित करने के लिए सभी स्तरों पर समन्वित प्रयासों की आवश्यकता है।

पालना गृह और सुरक्षित परित्याग व्यवस्था पर विशेष चर्चा

बैठक में एसपी ऋचा तोमर ने कहा कि यदि कोई माता अपने नवजात को किसी कारणवश नहीं पाल सकती, तो उसे असुरक्षित स्थानों पर न छोड़े। इसके लिए सरकार द्वारा स्थापित पालना गृहों का उपयोग किया जाए, जिससे नवजात सुरक्षित रूप से कानूनी प्रक्रिया में शामिल हो सके।

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बाल कल्याण समिति अध्यक्ष मनोज सोनी ने जानकारी दी कि नवजात शिशु के परित्याग के लिए दो वैधानिक विकल्प उपलब्ध हैं – 

  1. सीधे समिति के समक्ष समर्पण (Surrender):
    माता बाल कल्याण समिति के समक्ष निर्धारित फॉर्म भरकर बच्चे को समर्पित कर सकती है। समर्पण के बाद उसे पुनर्विचार हेतु 60 दिन का समय दिया जाता है।
    संपर्क नंबर: 9887844268
  2. पालना गृह में परित्याग (Anonymous Abandonment):
    यह प्रक्रिया पूरी तरह गोपनीय रहती है। राजकीय अस्पताल डीडवाना, लाडनूं और कुचामनसिटी में पालना गृह संचालित हैं। माता बिना किसी पहचान के नवजात को पालना गृह में छोड़ सकती है। इसके बाद अस्पताल द्वारा बाल कल्याण समिति को सूचना दी जाती है।
  • चाइल्ड हेल्पलाइन 1098 पर भी सूचना दी जा सकती है।
  • परित्याग करने वाली माताओं की पहचान पूरी तरह गोपनीय रखी जाती है।
  • उन्हें किसी भी प्रकार की कानूनी कार्रवाई का सामना नहीं करना पड़ता।

पुलिस अधीक्षक की आमजन से अपील
एसपी ऋचा तोमर ने सभी नागरिकों से अपील की कि नवजात शिशुओं और नाबालिगों की सुरक्षा हम सभी की सामूहिक जिम्मेदारी है।

यदि कोई माता-पिता किसी सामाजिक या आर्थिक कारणवश नवजात की देखभाल में असमर्थ हों, तो वे सरकारी वैकल्पिक व्यवस्था का लाभ लें ताकि बच्चा सुरक्षित, संरक्षित और एक बेहतर भविष्य की ओर अग्रसर हो सके।

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