Tuesday, March 17, 2026
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कुचामन में प्रॉपर्टी लेने वाले ग्राहकों के साथ धोखाधड़ी कर रहे कॉलोनाइजर

हाइवे के सेंटर से 132 फीट तक नहीं हो सकता निर्माण, फिर भी 100 फिट बाद बेच रहे भूखंड 

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कुचामनसिटी। किशनगढ़-हनुमानगढ़ मेगा हाइवे पर  कॉलोनाइजर प्लॉट खरीदने वाले लोगों के साथ धोखाधड़ी कर रहे है।

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पढ़ें हेमंत जोशी की यह खास रिपोर्ट –  

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हाल ही में मेगा हाइवे पर काटी जा रही कॉलोनियों में 100 फीट छोड़कर प्लॉट बेचे जा रहे है, जबकि 132 फीट तक निर्माण नहीं किया जा सकता है।

नियम 132 का बेच रहे 100 फीट बाद 

मेगा हाइवे पर बुडसू चौराहे के पास और डीडवाना चौराहे के पास काटी जा रही कॉलोनियों में हाइवे से 100 फीट छोड़कर भूखंड बेचे जा रहे है। जबकि मेगा हाइवे के नियमों के अनुसार 132 फीट छोड़कर ही नया निर्माण किया जा सकता है। ऐसे में ग्राहकों के 32 फीट जमीन के पैसे लेकर उनके साथ धोखाधड़ी की जा रही है।

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करोड़ों में हुई जमीन की सौदेबाजी 

सूत्रों से मिली जानकारी के अनुसार बुडसु चौराहे पर हाल ही एक बड़े जमीन का सौदा भी करोड़ों रुपए बीघा में हुआ है। जिसके चलते कॉलोनाइजर 100 फीट छोड़कर ग्राहकों को ठगने का प्रयास करने में जुट गए है। बताया जा रहा है कि इस जमीन का बेचान करीब 20 करोड़ रुपए से भी अधिक हुआ है। 

यह है नियम मेगाहाइवे पर दोनों ओर करीब 100 फीट जमीन Ridcor द्वारा छोड़ी गई थी, जिसे नॉन-एन्क्रॉचमेंट ज़ोन घोषित किया गया है। इसका नियंत्रण Ridcor के पास है और इस पर किसी भी प्रकार का निर्माण, अतिक्रमण या कब्जा प्रतिबंधित है। इसके बाद 32 फीट जमीन बिल्डअप एरिया नहीं है। जहां बिल्डिंग का निर्माण नहीं किया जा सकता है।

इस प्रकरण में एडीएम राकेश गुप्ता ने बताया कि यदि बिना लेआउट प्लान के कॉलोनी काटी जा रही है और 100 फीट छोड़कर प्लॉट बेचे जा रहे है और परिषद उनके पट्टे बनाती है चैक करवाकर आवश्यक कार्रवाई की जाएगी। 

मास्टर प्लान के अनुसार भी 132 फीट छोड़कर ही निर्माण स्वीकृति मिल सकती है। इसके बावजूद 100 फीट छोड़कर ही भूखंड बेचे जा रहे है और परिषद की ओर से इनका पट्टा बनाया जा रहा है। हालांकि पट्टा बनने के बाद भी भवन निर्माण की स्वीकृति 132 फीट छोड़कर ही दी जा रही है।

नगरपरिषद के मास्टर प्लान के अनुसार –

Ridcor की 100 फीट जमीन के बाद 32 फीट अतिरिक्त भूमि छोड़ने का नियम है। जहां निर्माण नहीं किया जा सकता। मास्टरप्लान की पालना करवाने वाली नगरपरिषद खुद भी इन कॉलोनियों पर अंकुश नहीं लगा रही है। जिम्मेदार अफसर भी नियमों को ताक में रख रहे है तो ऐसे में लोगों ने भी सड़क से महज 20-30 फीट पर ही टीन शेड लगाकर, अस्थाई दुकानें बनाकर अतिक्रमण कर लिए है।

नगरपरिषद के अधिकारी न केवल मूकदर्शक बने हुए है।

 जहां 132 फीट का स्थान सुरक्षित रहना चाहिए था, वहां लोग पहले से ही 100 फीट जमीन पर पक्के निर्माण कर चुके हैं।

कुचामन शहर में मेगा हाइवे पर डी मार्ट के सामने से डीडवाना रोड़ पर काला भाटा की ढाणी तक कमोबेश यही हाल है।

सबसे ज्यादा अतिक्रमण स्टेशन रोड, जूसरी चौराहा, बुडसु चौराहा और काला भाटा की ढाणी चौराहे पर हो रहे है।

क्यों छोड़ी जाती है हाईवे के किनारे जमीन?

हाईवे के किनारे नियमानुसार खाली जमीन छोड़ना आवश्यक होता है ताकि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, बिजली लाइनों, ग्रीन बेल्ट और अन्य अधोसंरचना के लिए जगह उपलब्ध रहे।

नॉन एंक्रोचमेंट जॉन 

यह क्षेत्र नॉन-एन्क्रॉचमेंट ज़ोन कहलाता है और यह तेज गति से चलने वाले ट्रैफिक के मद्देनज़र सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी है। यदि यह भूमि अतिक्रमित हो जाती है तो भविष्य में सड़क विकास के कार्यों में बाधा आती है और सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।

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