Saturday, May 16, 2026
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कुचामन सिटी: मूंड परिवार ने तोड़ी सामाजिक कुरीतियों की परंपरा, नहीं किया मृत्यु भोज

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कुचामन सिटी. ग्राम नगवाड़ा का मूंड परिवार इन दिनों अपनी अलग पहचान और कुरीतियों को हटाने के संकल्प के साथ ग्राम पंचायत नगवाड़ा एवं विभिन्न गांवों में अलख जगाने का कार्य कर रहा है।

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किसान बालाराम, डॉक्टर जी.आर. मूंड और प्रधानाचार्य किशोरमल मूंड ने गत दिनों अपने माता-पिता को सर्वोच्च मानते हुए मृत्यु भोज सहित अन्य कुरीतियों को हटाने का संकल्प लिया था।

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मालूम हो कि ग्राम पंचायत नगवाड़ा के सरपंच मनोज लौरा ने ग्राम पंचायत में आदेश जारी करते हुए नगवाड़ा ग्राम पंचायत क्षेत्र में सामाजिक कुरीतियों, विशेषकर मृत्यु भोज को समाप्त करने का आह्वान किया। सरपंच लौरा की इस पहल को ध्यान में रखते हुए मूंड परिवार ने मृत्यु भोज नहीं करने का संकल्प लिया।

डॉक्टर जी.आर. मूंड ने बताया कि उनके पिताजी मोतीराम मूंड का गत वर्ष 5 जुलाई को स्वर्गवास हो गया था। स्वर्गीय मोतीराम मूंड ने अपने जीवनकाल में अंधविश्वास के साथ-साथ कई सामाजिक कुरीतियों को हटाने का प्रयास किया था। उन्होंने साठ वर्ष पहले ही शिक्षा का महत्व समझते हुए अपने छोटे भाई स्वर्गीय गुलाराम (पूर्व प्रधान, कुचामन सिटी) को शिक्षा से जोड़ा और पढ़ाई-लिखाई पर ध्यान दिलवाया। वह एडवोकेट शिखर में रहकर वकालत के क्षेत्र से भी जुड़े।

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स्वर्गीय मोतीराम मूंड ने अपने तीनों पुत्रों को गांव के स्कूल में पढ़ाया और उन्हें चिकित्सा तथा शिक्षा के विभिन्न विभागों से जोड़ा।

वर्तमान समय में राजकीय प्रथम श्रेणी पशुचिकित्सालय जिलिया में डॉक्टर जी.आर. मूंड पशु चिकित्सा प्रभारी के रूप में सेवाएं दे रहे हैं। वहीं राजकीय वरिष्ठ उपाध्याय संस्कृत विद्यालय, रामगढ़ (सीकर) में प्रधानाचार्य किशोरमल मूंड संस्कृत शिक्षा विभाग में अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

स्वर्गीय मोतीराम मूंड की 60 वर्षों पूर्व शिक्षा की अलख का परिणाम है कि वर्तमान समय में नगवाड़ा गांव के मूंड परिवार की पीढ़ी दर पीढ़ी विभिन्न विभागों में कुल 10 परिवारजन अपनी सेवाएं दे रहे हैं।

स्वर्गीय मोतीराम परिवार मूंड समाज के लिए एक आदर्श पुरुष थे। आसपास के गांवों में व्यक्तिगत पहचान और जानकारी के लिए उन्हें “चलते-फिरते विकिपीडिया” के रूप में जाना जाता था। उनका व्यक्तित्व प्रभावशाली था और उन्होंने सम्पूर्ण परिवार को हमेशा साथ लेकर चलने का प्रयास किया।
शिक्षा में गहरी आस्था रखते हुए, अभावों में रहकर भी उन्होंने मूंड परिवार की युवा पीढ़ी को उच्च शिक्षा के लिए प्रेरित किया।

गांव से दूर शहरों में पढ़ने-लिखने के लिए भेजा, जिसके परिणामस्वरूप आज वे युवा शिक्षा और चिकित्सा जैसे क्षेत्रों में उच्च पदों पर आसीन होकर परिवार व समाज का नाम रोशन कर रहे हैं।

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