कुचामन सिटी। शहर में ट्रैफिक व्यवस्था का हाल वर्षों से बेहाल है और अतिक्रमण ने इस समस्या को और भी गंभीर बना दिया है। सबसे ज्यादा बुरा हाल राजकीय अस्पताल जाने वाली हॉस्पिटल रोड का है, जहां रोजाना जाम की स्थिति बनती है।


इस वजह से मरीजों को समय पर अस्पताल पहुंचाने में भारी परेशानी होती है और कई बार उनकी जान पर भी बन आती है।


अतिक्रमण ने बिगाड़ा हालात
हॉस्पिटल रोड पर दर्जनों मेडिकल और अन्य दुकानों के सामने बाइक्स खड़ी रहती हैं। कई मेडिकल संचालक अपनी दुकानों के काउंटर सड़क तक बढ़ाकर रखते हैं, जिससे सड़क पर आवाजाही मुश्किल हो जाती है।
यही नहीं, चाय और जूस की टपरियां भी आधी सड़क घेर लेती हैं। ठेले, पोस्टर और सड़क किनारे अव्यवस्थित पार्किंग ने इस सड़क को और भी संकीर्ण बना दिया है। परिणामस्वरूप, इमरजेंसी में भी यहां ट्रैफिक जाम लग जाता है।
राजकीय अस्पताल को छोड़कर आसपास के किसी भी प्राइवेट अस्पताल में पार्किंग की कोई व्यवस्थित सुविधा नहीं है।

नगरपरिषद की कार्रवाई केवल नाम की
नगरपरिषद द्वारा समय-समय पर अतिक्रमण हटाने के नाम पर अभियान चलाया जाता है, लेकिन यह सिर्फ चेतावनी तक सीमित रह जाते हैं। मेडिकल संचालक और अन्य दुकानदार बार-बार नियम तोड़ते हैं, फिर भी उनके खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं होती। इससे अतिक्रमण की स्थिति जस की तस बनी रहती है।
प्रशासन बदला, पर हालात वही
हाल ही में राजस्थान में हुए बड़े प्रशासनिक फेरबदल में डीडवाना-कुचामन जिले में भी नए अधिकारियों की नियुक्ति हुई है। महेंद्र खड़गावत ने कलक्टर और ऋचा तोमर ने पुलिस अधीक्षक का पदभार संभाला है। लेकिन ट्रैफिक व्यवस्था और अतिक्रमण की समस्या के साथ-साथ आम नागरिकों की अन्य परेशानियां भी जस की तस बनी हुई है।
कुचामन सिटी के एक आम आदमी की आवाज
रोज सुबह घर से निकलते ही सबसे पहले बारिश के मौसम में सड़कों पर फैली गंदगी से सामना होता है। इसके बाद बारी आती है सड़कों पर बने बड़े-बड़े गहरे गड्ढों से बचने की।
अगर किसी तरह गड्ढों से बच भी गए, तो सड़कों पर घूमते आवारा जानवर किसी न किसी तरह अस्पताल पहुंचा ही देंगे। लेकिन अस्पताल तक पहुंचना भी आसान नहीं है, क्योंकि अतिक्रमण के कारण ट्रैफिक जाम में ही फंस जाते हैं।
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