डीडवाना के निवासियों का नगरपरिषद से एक ही सवाल है – आख़िर कब तक लोग सड़कों और सार्वजनिक स्थानों पर मवेशियों के डर में जीते रहेंगे? आए दिन ऐसी घटनाएं सामने आ रही हैं जब आवारा मवेशियों की आपसी लड़ाई में आमजन घायल होते हैं, खासतौर पर बुजुर्ग लोग इसका शिकार बनते हैं।


बुधवार सुबह डीडवाना के बांगड़ जिला अस्पताल परिसर में दो सांडों के बीच करीब 20 मिनट तक जमकर लड़ाई हुई। यह भिड़ंत इतनी भयंकर थी कि आसपास मौजूद मरीजों और आगंतुकों में अफरा-तफरी मच गई। अस्पताल में आए मरीजों और उनके परिजनों के बीच भय का माहौल बन गया।

इस लड़ाई के दौरान कुछ लोग किसी तरह लाठियों और हिम्मत के बल पर इन मवेशियों को अस्पताल परिसर से बाहर निकाल पाए। लेकिन सवाल यह उठता है कि ना अस्पताल प्रशासन कुछ कर रहा है और ना ही नगरपरिषद।
लोगों का कहना है कि हर दिन अस्पताल के आसपास 4-5 आवारा मवेशी घूमते रहते हैं। ये कभी सड़क पर, कभी ट्रॉमा सेंटर के पास, तो कभी बच्चों के वार्ड के सामने लड़ते हैं और एक-दूसरे को धकेलते हैं। ऐसे में कई बार राह चलते लोग इनकी चपेट में आकर घायल भी हो जाते हैं।

अस्पताल के पास स्थित मेडिकल स्टोर संचालकों ने बताया कि सुबह से दोपहर तक अस्पताल में काफी भीड़ रहती है। इस दौरान मवेशी न केवल लोगों को डराते हैं, बल्कि उनके वाहनों को भी नुकसान पहुंचाते हैं। कई बार तो दुकानों में घुसने की कोशिश करते हैं, जिसके चलते दुकानदारों को मजबूरी में शटर बंद करने पड़ते हैं।
जनता की ओर से नगरपरिषद से मांग की गई है कि इन मवेशियों को जल्द से जल्द अस्पताल क्षेत्र से हटाया जाए और इन्हें नजदीकी गौशालाओं में भेजा जाए। क्योंकि यदि समय रहते कार्रवाई नहीं हुई, तो कोई बड़ी दुर्घटना कभी भी घट सकती है।
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