Sunday, May 3, 2026
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कुचामन सिटी: किशनगढ़-हनुमानगढ़ मेगाहाइवे पर 132 फीट की जगह 100 फीट छोड़ रहे कॉलोनाइजर

नियमों की उड़ रही धज्जियां, नगर परिषद भी बेपरवाह

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कुचामन सिटी। किशनगढ़-हनुमानगढ़ मेगाहाइवे पर जगह जगह नियमों की अनदेखी और अवैध निर्माण की भरमार हो गई है। नगरपरिषद जहां मास्टर प्लान की अनदेखी कर रही है वहीं अधिकारी भी नियम ताक में रखकर पट्टे जारी कर रहे है।

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मेगाहाइवे पर दोनों ओर करीब 100 फीट जमीन Ridcor द्वारा छोड़ी गई थी, जिसे नॉन-एन्क्रॉचमेंट ज़ोन घोषित किया गया है। इसका नियंत्रण Ridcor के पास है और इस पर किसी भी प्रकार का निर्माण, अतिक्रमण या कब्जा प्रतिबंधित है।

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अब यहां पर नगरपरिषद और स्थानीय लोगों द्वारा रोड इन्फ्रास्ट्रक्चर डवलपमेंट कंपनी (Ridcor) के नियमों की खुलेआम अवहेलना की जा रही है।

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नगरपरिषद के मास्टर प्लान के अनुसार –

Ridcor की 100 फीट जमीन के बाद 32 फीट अतिरिक्त भूमि छोड़ने का नियम है। लेकिन मास्टरप्लान की पालना करवाने वाली नगरपरिषद खुद 100 फीट छोड़कर ही पट्टे भी जारी कर रही है। जिम्मेदार अफसर भी नियमों को ताक में रख रहे है तो ऐसे में लोगों ने भी सड़क से महज 20-30 फीट पर ही टीन शेड लगाकर, अस्थाई दुकानें बनाकर अतिक्रमण कर लिए है।

जिम्मेदार जागे तब सुरक्षित और योजनाबद्ध विकास सुनिश्चित किया जा सके। लेकिन प्रशासन की लापरवाही और मिलीभगत के चलते स्थानीय लोगों ने इस आरक्षित भूमि पर अतिक्रमण कर लिया।

नगरपरिषद के अधिकारी न केवल मूकदर्शक बने हुए है। कई मामलों में पट्टे तक जारी कर दिए गए। परिणामस्वरूप, जहां 132 फीट का स्थान सुरक्षित रहना चाहिए था, वहां लोग पहले से ही 100 फीट जमीन पर पक्के निर्माण कर चुके हैं।

कुचामन शहर में मेगा हाइवे पर डी मार्ट के सामने से डीडवाना रोड़ पर काला भाटा की ढाणी तक कमोबेश यही हाल है।

सबसे ज्यादा अतिक्रमण स्टेशन रोड, जूसरी चौराहा, बुडसु चौराहा और काला भाटा की ढाणी चौराहे पर हो रहे है।

क्यों छोड़ी जाती है हाईवे के किनारे जमीन?

हाईवे के किनारे नियमानुसार खाली जमीन छोड़ना आवश्यक होता है ताकि भविष्य में सड़क चौड़ीकरण, सर्विस रोड, बिजली लाइनों, ग्रीन बेल्ट और अन्य अधोसंरचना के लिए जगह उपलब्ध रहे।

यह क्षेत्र नॉन-एन्क्रॉचमेंट ज़ोन कहलाता है और यह तेज गति से चलने वाले ट्रैफिक के मद्देनज़र सुरक्षा के लिहाज से भी जरूरी है। यदि यह भूमि अतिक्रमित हो जाती है तो भविष्य में सड़क विकास के कार्यों में बाधा आती है और सार्वजनिक सुरक्षा को गंभीर खतरा उत्पन्न होता है।

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