
नावां नमक न्यूज: गर्मियों की दस्तक के साथ राजस्थान की नमक औद्योगिक नगरी नावां एक बार फिर सुनहरी सफेद चादर की तरह चमक उठी है। साथ ही नमक लदान बंद की हड़ताल समाप्त होते ही व्यापारिक गतिविधियां फिर से पटरी पर आ गई हैं।

सर्दियों के मौसम में तापमान कम होने से पानी का वाष्पीकरण धीमा हो जाता है। जिससे नमक की क्रिस्टलाइजेशन प्रक्रिया प्रभावित होती है और उत्पादन कम हो जाता है।


वहीं, बारिश के समय नमक की क्यारियां जलमग्न हो जाती हैं जिससे उत्पादन ठप पड़ जाता है। लेकिन अब जैसे ही तापमान बढ़ा और अधिकतम 36 डिग्री सेल्सियस तक पहुंचा। पानी के तेजी से वाष्पित होने से नमक के उत्पादन में तेज आ गई।
जिससे इस उद्योग से जुड़े हजारों श्रमिकों को फिर से रोजगार मिलने लगा। राजस्थान में नावां और सांभर दो प्रमुख क्षेत्र हैं जहां सबसे अधिक नमक उत्पादन होता है। यहां तैयार किया गया नमक राज्य सहित अन्य राज्यों को भी ट्रांसपोर्ट किया जाता है। गर्मियों की शुरुआत के साथ व्यापारियों ने अपनी रिफाइनरियों में काम फिर से शुरू कर दिया है जिससे नमक की शुद्धिकरण प्रक्रिया तेज हो गई है।
सप्लाई बढ़ने से वर्तमान में नमक का भाव 130 रुपये प्रति क्विंटल है जो बाजार की स्थिति के अनुसार बदल सकता है। भारत विश्व का तीसरा सबसे बड़ा नमक उत्पादक देश है जहां हर साल 28-30 मिलियन टन (2.8-3 करोड़ टन) नमक का उत्पादन होता है जिसमें राजस्थान का योगदान लगभग 7-10% है, वहीं सांभर और नावां मिलकर राजस्थान के कुल नमक उत्पादन का 17-25% और भारत के कुल उत्पादन का 1.7-2% योगदान देते हैं।
इन दोनों क्षेत्रों से लगभग 5.1 लाख टन नमक उत्पादित किया जाता है। राजस्थान में नमक उत्पादन की बढ़ती संभावनाओं को देखते हुए सरकार और व्यापारिक संगठनों द्वारा इस उद्योग को और मजबूत बनाने के प्रयास किए जा रहे हैं ताकि आधुनिक तकनीकों और बेहतर बुनियादी ढांचे को अपनाकर उत्पादन को और अधिक बढ़ाया जा सके जिससे न केवल नमक की आपूर्ति बेहतर होगी बल्कि श्रमिकों को भी स्थायी रोजगार मिलेगा।
नमक लदान हड़ताल समाप्त, आज से होगा लदान शुरू
राजस्थान की नमक नगरी नावां में नमक लदान बंदी को लेकर चली आ रही हड़ताल समाप्त हो गई है। विभिन्न पक्षों के बीच हुए समझौते के तहत 1 अप्रैल से नमक लदान शुरू किया जाएगा। बैठक में तय किया गया कि नमक के भाव 130 रुपये प्रति क्विंटल रहेंगे और गुणवत्ता के अनुसार नकद भुगतान किया जाएगा। रिफाइनरी और प्लांट संचालकों को नमक बिल का भुगतान सात दिनों के भीतर करना होगा। यदि नमक उधार बेचा जाता है, तो 45 से 60 दिनों में बिल का भुगतान अनिवार्य होगा। यदि 60 दिन पूरे होने के बाद नमक उत्पादक यूनियन में सूचना देता है, तो उसके सात दिनों में भुगतान करना होगा। यदि भुगतान निर्धारित अवधि के बाद भी नहीं होता है, तो बिल की राशि पर 18 प्रतिशत वार्षिक ब्याज लगेगा।
इसके अलावा, 1 अप्रैल से नमक उत्पादकों द्वारा सौदा दिनों के आधार पर नहीं किया जाएगा, बल्कि क्विंटल के आधार पर किया जाएगा। रिफाइनरी और प्लांट संचालकों द्वारा नमक उत्पादकों के बिल से जो दस पैसे प्रति क्विंटल काटे जाते हैं, उन्हें चार माह के भीतर आगामी पांच तारीख तक सोसायटी के खाते में जमा करवाना अनिवार्य होगा। सभी रिफाइनरी और प्लांट संचालकों को नमक की गुणवत्ता का आकलन नमक उत्पादन स्थल पर ही करना होगा, ताकि बाद में नमक के भावों में गिरावट या लदान में किसी तरह की समस्या न हो।
बैठक में रहे ये प्रमुख लोग मौजूद
इस बैठक में सोसायटी अध्यक्ष दिनेश जांदू, उत्पादक संघ के अध्यक्ष केसाराम लौरा, रिफाइनरी एसोसिएशन के अध्यक्ष अनिल गट्टानी, मेनुअल प्लांट एसोसिएशन के अध्यक्ष महेश अग्रवाल के साथ ही जगदीश रोहेला, रामेश्वर रणवा, छोटू डारा, रामप्रसाद कुमावत, इंदर कीलका, राजकुमार पुरोहित, मोहित बेरीवाल, विष्णु मोदी, किशन चौधरी, मोहन यादव, परमेश गोयल सहित सैकड़ों नमक उद्यमी मौजूद रहे। इस समझौते से नमक उद्योग में स्थिरता आने की उम्मीद है और इससे जुड़े व्यापारियों व श्रमिकों को राहत मिलेगी।
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