कुचामन सिटी में बुधवार को सहभागी समाजों की ओर से यूजीसी कानून वापस लेने सहित विभिन्न मांगों को लेकर उपखंड अधिकारी को ज्ञापन सौंपा गया। साथ ही चेतावनी दी गई कि मांगें नहीं मानी गईं तो आने वाले निकाय और पंचायत चुनावों में सरकार को नतीजा भुगतना होगा।

सहभागी राजपूत परिवार मंच के अध्यक्ष इंजीनियर महावीर सिंह शेखावत झाझड़ के नेतृत्व में राजपूत समाज सहित सर्वसमाज के नागरिकों और संगठनों ने शांतिपूर्ण तरीके से राष्ट्रपति, प्रधानमंत्री, राज्यपाल और मुख्यमंत्री के नाम ज्ञापन सौंपा।

बताया गया कि राजस्थान के 34 विधानसभा क्षेत्रों में एक साथ पांच अलग-अलग सहभागी ज्ञापन दिए गए। इनमें डीडवाना-कुचामन, झुंझुनूं, सीकर, चूरू और नागौर जिलों की विधानसभा सीटों के अलावा नोहर, भादरा और चौमूं विधानसभा क्षेत्र शामिल हैं। स्थानीय स्तर पर एसडीएम, तहसीलदार या कलक्टर को ज्ञापन सौंपे गए।
ज्ञापन में प्रमुख मांगें –
ज्ञापन में ईडब्ल्यूएस आरक्षण के संपूर्ण सरलीकरण सहित 12 मांगें रखी गईं। इसमें ईडब्ल्यूएस आरक्षण को बढ़ाकर 20 प्रतिशत करने और इसे पंचायतीराज, शहरी निकायों के साथ चुनाव आयोग की ओर से आयोजित सभी चुनावों में लागू करने की मांग की गई।

इसके अलावा यूजीसी कानून को वापस लेने, पेपर लीक माफिया के खिलाफ फास्ट ट्रैक कोर्ट में कार्रवाई कर फांसी की सजा देने और उच्च शिक्षण संस्थानों में ईडब्ल्यूएस वर्ग के विद्यार्थियों के संरक्षण के लिए नया कानून बनाने की मांग की गई।
एससी, एसटी, ओबीसी और ईडब्ल्यूएस आरक्षण को बनाए रखने, मुस्लिम सहित सभी धार्मिक अल्पसंख्यकों को सामाजिक एवं धार्मिक संरक्षण देने तथा यूनिफॉर्म सिविल कोड बनाते समय उनकी सहभागिता सुनिश्चित करने की मांग भी ज्ञापन में शामिल रही।
इसके साथ देवराज सिंह पलाड़ा के परिवार को कम से कम एक करोड़ रुपए की सहायता और एक स्थायी सरकारी नौकरी देने की मांग उठाई गई।
छह महीने से चल रहा आंदोलन
निकाय-पंचायत चुनावों में होगी परेशानी
आयोजकों ने बताया कि सहभागी आंदोलन करीब छह महीने से चल रहा है, लेकिन राजस्थान सरकार की ओर से अब तक वार्ता के लिए आमंत्रित नहीं किया गया। उन्होंने कहा कि सरकार का यही रवैया आगामी पंचायतीराज और शहरी निकाय चुनावों में उसे परेशान कर सकता है। विपक्षी दलों को भी ज्ञापन दिए जा चुके हैं और उनसे विधानसभा के आगामी मानसून सत्र में सहभागी समाजों की मांगों को उठाने की अपील की गई है।
उन्होंने बताया कि हजारों की संख्या में सहभागी शिविर लगाने और पक्ष-विपक्ष को ज्ञापन देने के बावजूद उनकी मांगों पर सुनवाई नहीं हुई। उन्होंने चेतावनी दी कि इसके बाद भी सरकारों ने मांगों पर ध्यान नहीं दिया तो शांतिपूर्ण तरीके से आंदोलन को पूरे राजस्थान में व्यापक रूप दिया जाएगा।
ज्ञापन देने वालों में पूर्व सरपंच भगवान सिंह रसाल, राजेन्द्र सिंह प्रेमपरा, जोगेंद्र सिंह रुपुरा, श्रीपाल सिंह रसाल, भानुप्रताप सिंह खारिया, प्रहलाद सिंह शेखावत, सुरेंद्र सिंह अडानी, हेम सिंह मेड़तिया, दुर्गा सिंह प्रेमपरा, नरेन्द्र सिंह रूपरा, छोटू सिंह रावा, कुन्दन सिंह रावा, मनोज शर्मा, श्रवण सिंह कांकरिया, विनोद सिंह लीचना और सुरेंद्र सिंह जुसरी सहित अन्य लोग मौजूद रहे।
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