Saturday, June 6, 2026
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कुचामन सिटी: सरकारी जनगणना कर्मियों ने भाड़े पर रखे लोग, उनकी जगह लोगों के घर जाकर कर रहे सर्वे

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कुचामन सिटी/नावां शहर: बड़ी खबर सामने आई है कि जनगणना में लगे कुछ प्रगणकों और पर्यवेक्षकों ने ऐसा तिगड़म बैठाया है, जिसे सुनने के बाद अधिकारियों के निरीक्षण और निगरानी व्यवस्था पर भी सवाल खड़े हो गए हैं।

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डीडवाना-कुचामन जिले से खबर सामने आई है कि जनगणना कार्य में नियुक्त कुछ कार्मिक स्वयं मौके पर जाकर कार्य करने के बजाय अपने स्थान पर निजी व्यक्तियों को लगाकर सर्वे और आंकड़े संकलित करने का कार्य करवा रहे हैं।

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इन कर्मियों ने उच्च अधिकारियों को तो धोखे में रखा ही, साथ ही नागरिकों की निजी जानकारी के साथ भी खिलवाड़ किया।

भाड़े पर रखे अपनी जगह काम करने वाले

लंबे समय से यह मांग उठती रही है कि जनगणना जैसे कार्य शिक्षकों और अन्य विभागों के कर्मचारियों से नहीं करवाए जाएं। हालांकि सरकार ने इस मांग पर ध्यान नहीं दिया, लेकिन कुछ कार्मिकों ने काम से बचने का अपना तरीका निकाल लिया। आरोप है कि उन्होंने अपनी जगह पैसे देकर अन्य लोगों को रखा और उन्हें अपने निर्धारित क्षेत्रों में जनगणना कार्य करने की जिम्मेदारी सौंप दी।

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ग्रामीण क्षेत्रों में अधिकांश लोग सवाल नहीं करते कि सर्वे करने वाला व्यक्ति वास्तव में अधिकृत कर्मचारी है या नहीं। ऐसे में संबंधित लोगों के लिए यह काम करना आसान हो गया।

पर्यवेक्षक भी मिले हुए

इस काम में प्रगणक अकेले नहीं हैं, पर्यवेक्षक भी उनके साथ मिले हुए हैं। पर्यवेक्षक की नियुक्ति प्रगणकों की निगरानी करने के लिए की जाती है। ऐसे में दोनों की मिलीभगत से यह पूरा खेल चलता रहा।

सरकारी अधिकारियों तक रिपोर्ट पहुंचती रही कि काम ठीक से चल रहा है, लेकिन जमीन पर अलग ही खेल चल रहा था।

इतने महत्वपूर्ण कार्य में इतनी बड़ी लापरवाही

जनगणना केवल आंकड़े जुटाने की प्रक्रिया नहीं है, बल्कि देश की विकास योजनाओं, संसाधनों के वितरण और नीतिगत निर्णयों का आधार होती है। ऐसे में इस कार्य में किसी भी प्रकार की लापरवाही या अनधिकृत व्यक्ति की भागीदारी आंकड़ों की विश्वसनीयता को प्रभावित कर सकती है।

सरकार द्वारा प्रशिक्षित एवं अधिकृत कार्मिकों को यह जिम्मेदारी इसलिए सौंपी जाती है ताकि वे निर्धारित दिशा-निर्देशों के अनुरूप सही और प्रमाणिक जानकारी एकत्रित कर सकें। इसके विपरीत यदि निजी व्यक्ति बिना किसी अधिकार और प्रशिक्षण के यह कार्य करते हैं तो जानकारी में त्रुटियां होने की आशंका बढ़ जाती है।

जानकारों का मानना है कि जनगणना जैसे संवेदनशील और जिम्मेदारीपूर्ण राष्ट्रीय कार्य में गोपनीय सूचनाएं भी एकत्रित की जाती हैं। ऐसे में निजी व्यक्तियों को कार्य में शामिल करना न केवल नियमों के विरुद्ध है, बल्कि नागरिकों की व्यक्तिगत जानकारी की सुरक्षा पर भी प्रश्नचिह्न खड़ा करता है।

3 दिन पहले ही किया था जिला समन्वयक ने निरीक्षण

3 जून को जयपुर से जिला समन्वयक कमलेश शर्मा कुचामन सिटी पहुंचे थे। इसके बाद अधिकारियों ने निरीक्षण किया, जिनमें नगर जनगणना अधिकारी शिकेश कांकरिया भी मौजूद थे। उन्होंने ग्राउंड पर निरीक्षण किया और उन्हें सब कुछ ठीक भी लगा।

लेकिन इस खबर के सामने आने के बाद अब अधिकारी भी सिर पकड़कर बैठ गए हैं। उनके नाक के नीचे इतना बड़ा फर्जीवाड़ा हो रहा था। जहां सरकारी अधिकारी बनकर व्यक्ति लोगों के घरों में घुस रहे थे। यह सुरक्षा व्यवस्था में भी बड़ी चूक मानी जा रही है।

लोगों की निजी जानकारी से खिलवाड़

यह गंभीर लापरवाही लोगों की निजी जानकारी के साथ खिलवाड़ है। जनगणना के दौरान कई ऐसे सवालों के जवाब देने होते हैं जो किसी अनजान व्यक्ति को पता नहीं होने चाहिए।

घर में कितने सदस्य हैं, कौन क्या काम करता है, घर कैसा है और अन्य कई महत्वपूर्ण जानकारियां जनगणना के दौरान ली जाती हैं। लोगों ने सरकारी कर्मचारी समझकर उन्हें अपनी जानकारी बताई, लेकिन अब वे स्वयं को ठगा हुआ महसूस कर रहे हैं।

ऐसी संवेदनशील जानकारी का अनधिकृत व्यक्तियों तक पहुंचना सुरक्षा की दृष्टि से भी चिंता का विषय है।

लोगों की मांग है निष्पक्ष जांच

क्षेत्रवासियों ने इस मामले की निष्पक्ष जांच करवाकर दोषी कार्मिकों के खिलाफ कार्रवाई की मांग की है।

ग्रामीणों और जागरूक नागरिकों ने जिला प्रशासन एवं संबंधित विभाग से मांग की है कि जनगणना कार्य में लगे कार्मिकों की नियमित निगरानी की जाए तथा यह सुनिश्चित किया जाए कि कार्य केवल अधिकृत एवं प्रशिक्षित कर्मचारियों द्वारा ही किया जाए।

साथ ही यदि किसी कार्मिक द्वारा अपने स्थान पर निजी व्यक्ति से कार्य करवाने की पुष्टि होती है तो उसके खिलाफ नियमानुसार सख्त कार्रवाई की जाए।

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