कुचामन शहर में ज्येष्ठ शुक्ल पक्ष की निर्जला एकादशी का पर्व गुरुवार को श्रद्धा, आस्था और धार्मिक उल्लास के साथ मनाया गया। सुबह ब्रह्ममुहूर्त से ही शहर के विभिन्न भगवान विष्णु एवं लक्ष्मी-नारायण मंदिरों में श्रद्धालुओं का तांता लग गया।


बड़ी संख्या में महिलाओं ने निर्जला व्रत रखकर भगवान विष्णु और माता लक्ष्मी की विधि-विधान से पूजा-अर्चना की तथा परिवार की सुख-समृद्धि, पति की दीर्घायु, संतान के उज्ज्वल भविष्य और घर-परिवार में सुख-शांति की कामना की। वहीं पुरुष श्रद्धालुओं ने भी निर्जल व्रत रखकर भगवान विष्णु की आराधना की।

धार्मिक मान्यता के अनुसार – निर्जला एकादशी भगवान विष्णु को समर्पित होती है। इस दिन श्रद्धालु अन्न और जल का त्याग कर उपवास रखते हैं। मान्यता है कि श्रद्धा और नियमपूर्वक किया गया यह व्रत वर्षभर की सभी 24 एकादशियों के व्रत के समान पुण्यफल प्रदान करता है। महाभारत के अनुसार महर्षि वेदव्यास के कहने पर भीमसेन ने इसी एक व्रत का पालन किया था, इसलिए इसे भीमसेनी एकादशी अथवा पांडव एकादशी भी कहा जाता है।
मंदिरों में दिनभर विष्णु सहस्रनाम का पाठ, भजन-कीर्तन, आरती एवं धार्मिक अनुष्ठानों का आयोजन हुआ। श्रद्धालुओं ने भगवान विष्णु को तुलसी दल, पीले पुष्प, फल एवं प्रसाद अर्पित किए। कई महिलाओं ने एकादशी व्रत कथा का श्रवण कर दान-पुण्य किया तथा जरूरतमंदों को जल, फल, घड़े, छाते और अन्य उपयोगी सामग्री का दान दिया।

शाम को मंदिरों में विशेष आरती के साथ धार्मिक आयोजनों का समापन हुआ और पूरे शहर में भक्तिमय वातावरण बना रहा।






