कुचामन सिटी. शहर की घनी आबादी में संचालित विवाह स्थलों और देर रात तक बजने वाले डीजे को लेकर उठ रही शिकायतों का मामला अब लोक अदालत तक पहुंच गया है।


मामले में न्यायालय ने गंभीरता दिखाते हुए पुलिस प्रशासन और नगर परिषद सहित विवाह स्थल संचालकों को नोटिस जारी कर 10 मार्च को तलब किया है।

मानवाधिकार सुरक्षा संगठन राजस्थान के प्रदेश अध्यक्ष मुन्नालाल काछवाल ने ताल्लुका विधिक सेवा समिति के अध्यक्ष एवं अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खरोल के समक्ष प्री-लिटिगेशन प्रकरण प्रस्तुत किया।
इसमें पुलिस अधीक्षक डीडवाना-कुचामन, वृताधिकारी कुचामन, थानाधिकारी कुचामन, नगर परिषद आयुक्त कुचामन सहित कई विवाह स्थल संचालकों को प्रतिपक्षी बनाया गया है।

प्रकरण में बताया गया कि शहर में सरला बिरला कल्याण मंडप, नर्मदा गार्डन, बसंत कुमार बिरला बारात भवन, कोठारी भवन, न्यू माहेश्वरी भवन सहित कई विवाह स्थल घनी आबादी के बीच संचालित हो रहे हैं। जहां पार्किंग की पर्याप्त व्यवस्था नहीं है।
समारोह में आने वाले लोग वाहनों को सड़कों पर खड़ा कर देते हैं। जिससे आसपास के रहवासियों को घर आने-जाने में परेशानी का सामना करना पड़ता है।इसके अलावा देर रात तक तेज आवाज में डीजे बजाने से आमजन प्रभावित हो रहा है।
शिकायत करने पर कई बार विवाद की स्थिति भी बन जाती है। काछवाल ने आरोप लगाया कि स्थानीय पुलिस प्रशासन को शिकायत देने के बावजूद प्रभावी कार्रवाई नहीं होती बल्कि कई बार शिकायतकर्ता की पहचान उजागर कर दी जाती है।
मामले की गंभीरता को देखते हुए अपर जिला एवं सेशन न्यायाधीश सुंदरलाल खरोल ने पुलिस अधीक्षक डीडवाना, वृताधिकारी व थानाधिकारी कुचामन सहित नगर परिषद आयुक्त और विवाह स्थल संचालकों को नोटिस जारी कर 10 मार्च को उपस्थित होने के निर्देश दिए हैं।
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