कुचामन सिटी में राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम (RSRTC) की लापरवाही का मामला सामने आया है। जहां एक वरिष्ठ नागरिक को आवेदन और भुगतान के बावजूद एक वर्ष तक स्मार्ट कार्ड नहीं मिला। इस मामले को लेकर अब प्री-लिटिगेशन स्तर पर कानूनी कार्रवाई शुरू कर दी गई है।


प्राप्त जानकारी के अनुसार – एडवोकेट महेंद्र कुमार पारीक (67 वर्ष) निवासी न्यू कॉलोनी कुचामन सिटी ने दिनांक 16 मार्च 2026 को तालुका विधिक सेवा समिति कुचामन सिटी में प्री-लिटिगेशन प्रार्थना पत्र प्रस्तुत किया है। यह प्रार्थना पत्र राजस्थान राज्य पथ परिवहन निगम के अध्यक्ष, प्रबंध निदेशक व अन्य अधिकारियों के खिलाफ दिया गया है।

एडवोकेट महेंद्र कुमार पारीक ने बताया कि उन्होंने 29 अप्रैल 2025 को वरिष्ठ नागरिक स्मार्ट कार्ड बनवाने के लिए निगम की “RSRTC RFID SMART CARD APP” के माध्यम से ऑनलाइन आवेदन किया था। आवेदन संख्या 179233 दर्ज हुई और उन्होंने अपने स्टेट बैंक ऑफ इंडिया खाते से 115 रुपए शुल्क भी ऑनलाइन जमा कर दिया।
उन्होंने बताया कि निगम कार्यालय के बाहर लगे विज्ञापन (फ्लेक्स) में ऑनलाइन आवेदन की सुविधा का उल्लेख था। जिस पर विश्वास कर उन्होंने यह प्रक्रिया अपनाई।

पैसे कटे, लेकिन स्मार्ट कार्ड नहीं बना
कुछ दिनों बाद जब उन्होंने ऐप पर स्टेटस चेक किया, तो उसमें केवल वर्चुअल स्मार्ट कार्ड बना हुआ दिखाई दिया, लेकिन उसमें ID नंबर नहीं था और भुगतान की स्थिति “Unpaid” (भुगतान नहीं हुआ) दर्शाई गई, जबकि बैंक से राशि कट चुकी थी।

इसके अलावा, कार्ड की डिलीवरी उनके घर पर होनी थी। लेकिन करीब एक साल बीत जाने के बाद भी कार्ड नहीं मिला। शिकायत के लिए दिए गए हेल्पलाइन नंबर पर कई बार संपर्क करने की कोशिश की गई, लेकिन कोई जवाब नहीं मिला।
एडवोकेट पारीक ने बताया कि स्मार्ट कार्ड की वैधता 5 वर्ष होती है। लेकिन उनका एक वर्ष बिना कार्ड के ही व्यर्थ चला गया। इससे उन्हें मानसिक परेशानी और असुविधा का सामना करना पड़ा।
प्रार्थना पत्र में निम्न मांगें रखी गई हैं –
- नया वरिष्ठ नागरिक स्मार्ट कार्ड 2026 से अगले 5 वर्षों की वैधता के साथ जारी किया जाए।
- कार्ड को रजिस्टर्ड डाक से घर पर पहुंचाया जाए।
- मानसिक संताप के लिए ₹50,000 मुआवजा और मुकदमे का खर्च दिलाया जाए।
- RSRTC ऐप की तकनीकी खामियों को ठीक करने के निर्देश दिए जाएं ताकि भविष्य में अन्य लोगों को परेशानी न हो।






