Sunday, March 29, 2026
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गैस सिलेंडर की किल्लत के बीच साइबर ठग सक्रिय, ऐसे तरीकों से कर रहे बैंक अकाउंट खाली

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एलपीजी गैस सिलेंडर सप्लाई संकट के बीच ठगों के नए तरीके –

राजस्थान सहित देश के कई हिस्सों में इन दिनों एलपीजी गैस सिलेंडर की सप्लाई प्रभावित होने से लोगों को काफी परेशानी का सामना करना पड़ रहा है। कई शहरों में उपभोक्ता सुबह से गैस एजेंसियों के बाहर लंबी लाइनों में खड़े दिखाई दे रहे हैं। वहीं बड़ी संख्या में लोग हेल्पलाइन नंबर, डिस्ट्रीब्यूटर या मोबाइल ऐप के जरिए सिलेंडर बुक करने की कोशिश कर रहे हैं।

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ऐसे समय में साइबर ठग भी सक्रिय हो गए हैं। गैस बुकिंग, सब्सिडी, केवाईसी अपडेट और डिलीवरी के नाम पर ठग अलग-अलग डिजिटल तरीके अपनाकर लोगों से बैंक की जानकारी और ओटीपी हासिल कर लेते हैं। जिसके बाद उनके बैंक खाते से पैसे निकाल लिए जाते हैं।

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कई लोग इन तरीकों के बारे में पूरी जानकारी नहीं होने के कारण आसानी से ठगी का शिकार हो जाते हैं।

ठग किस तरह करते हैं गैस सिलेंडर के नाम पर ठगी –

फर्जी गैस बुकिंग लिंक भेजना

साइबर ठग एसएमएस या व्हाट्सएप पर संदेश भेजते हैं कि “यहां क्लिक करके तुरंत गैस सिलेंडर बुक करें।”

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लिंक पर क्लिक करने पर एक वेबसाइट खुलती है जो देखने में बिल्कुल असली गैस कंपनी जैसी लगती है। वहां बुकिंग करने के लिए कार्ड नंबर, यूपीआई या बैंक विवरण भरने को कहा जाता है। जैसे ही व्यक्ति जानकारी भरता है। ठग उसी समय उसके बैंक खाते से पैसे निकाल लेते हैं।

सब्सिडी बंद होने का डर दिखाना

ठग कॉल करके कहते हैं कि आपकी एलपीजी गैस सब्सिडी बंद होने वाली है और इसे चालू रखने के लिए तुरंत केवाईसी अपडेट करना होगा।

वे एक लिंक भेजते हैं या ओटीपी मांगते हैं। कई लोग यह सोचकर जानकारी दे देते हैं कि यह गैस कंपनी का कर्मचारी है। ओटीपी मिलते ही ठग बैंक खाते से लेनदेन कर देते हैं।

नकली हेल्पलाइन नंबर से ठगी

कई बार लोग गूगल पर गैस एजेंसी का नंबर खोजते हैं। ठग इसी का फायदा उठाकर इंटरनेट पर फर्जी ग्राहक सेवा नंबर डाल देते हैं।

जब ग्राहक उस नंबर पर कॉल करता है तो सामने वाला व्यक्ति खुद को गैस एजेंसी का कर्मचारी बताता है और कहता है कि बुकिंग करने या शिकायत दर्ज करने के लिए कुछ जानकारी देनी होगी। इसी बहाने बैंक विवरण या ओटीपी लेकर पैसे निकाल लिए जाते हैं।

स्क्रीन साझा करने वाला ऐप डाउनलोड करवाना

अगर आपके पास स्मार्टफोन है तो साइबर ठग आपको फोन करके कह सकते हैं कि आपकी गैस बुकिंग में तकनीकी समस्या आ गई है और इसे ठीक करने के लिए मोबाइल में एक ऐप डाउनलोड करना होगा।

ठग आमतौर पर एनीडेस्क या क्विकसपोर्ट जैसे स्क्रीन शेयरिंग ऐप डाउनलोड करने के लिए कहते हैं। कई लोग यह समझकर ऐप इंस्टॉल कर लेते हैं कि इससे गैस बुकिंग की समस्या ठीक हो जाएगी। लेकिन जैसे ही यह ऐप मोबाइल में इंस्टॉल होता है।ठग आपके मोबाइल की स्क्रीन दूर बैठकर देख सकते हैं और कई मामलों में मोबाइल को नियंत्रित भी कर लेते हैं।

इसके बाद अगर आपके फोन में बैंकिंग ऐप या यूपीआई ऐप खुला हो तो ठग उसी का फायदा उठाकर पैसे ट्रांसफर कर सकते हैं।

क्यूआर कोड स्कैन करवाकर पैसे निकालना

कई बार ठग कहते हैं कि गैस बुकिंग कन्फर्म करने के लिए क्यूआर कोड स्कैन करना होगा।
लोग यह समझते हैं कि इससे भुगतान मिलेगा या बुकिंग कन्फर्म होगी। लेकिन क्यूआर कोड स्कैन करते ही उनके खाते से पैसे कट जाते हैं।

गैस डिलीवरी एजेंट बनकर कॉल

कुछ ठग गैस डिलीवरी एजेंट बनकर फोन करते हैं और कहते हैं कि आपका सिलेंडर रास्ते में है, लेकिन डिलीवरी कन्फर्म करने के लिए ओटीपी बताना होगा।

लोग ओटीपी बता देते हैं और उसी ओटीपी का इस्तेमाल करके ठग बैंक खाते से पैसा निकाल लेते हैं।

कम कीमत में तुरंत सिलेंडर देने का लालच

ईरान और अमेरिका-इजराइल के बीच चल रहे युद्ध के कारण गैस सिलेंडर की सप्लाई को लेकर दिक्कतें सामने आ रही हैं। इसी स्थिति का फायदा उठाकर कुछ लोग कमर्शियल और घरेलू गैस सिलेंडर की कालाबाजारी भी कर रहे हैं। कई जगह सिलेंडर 2000 से 2500 रुपए तक में बिकने की बातें सामने आ रही हैं और जरूरत के कारण कई लोग ज्यादा पैसे देने को भी तैयार हो जाते हैं।

साइबर ठग इसी मौके का फायदा उठाते हैं। वे सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर मैसेज और विज्ञापन डालते हैं कि उनके पास तुरंत गैस सिलेंडर उपलब्ध है या बिना लाइन के जल्दी डिलीवरी करवा देंगे।

जल्दी सिलेंडर पाने की उम्मीद में लोग उनसे संपर्क कर लेते हैं। इसके बाद ठग बुकिंग या डिलीवरी के नाम पर पहले ही पैसे ट्रांसफर करने के लिए कहते हैं। जैसे ही पैसा भेजा जाता है। ठग फोन बंद कर देते हैं

नकली गैस कंपनी की वेबसाइट

साइबर अपराधी असली गैस कंपनियों की तरह दिखने वाली नकली वेबसाइट बना लेते हैं।
इसमें कंपनी का लोगो, बुकिंग विकल्प और ग्राहक सेवा नंबर भी दिखते हैं। जब ग्राहक वहां लॉगिन या भुगतान करता है तो उसकी बैंक जानकारी चोरी हो जाती है।

व्हाट्सएप पर नकली ऐप भेजना

कुछ ठग व्हाट्सएप पर “गैस बुकिंग ऐप” या “गैस बिल” नाम से एपीके फाइल भेजते हैं और कहते हैं कि इसे डाउनलोड करके बुकिंग करें।
जैसे ही यह फाइल इंस्टॉल होती है। मोबाइल में वायरस आ सकता है जो बैंक ऐप की जानकारी चोरी कर लेता है।

बकाया गैस बिल का मैसेज

कई लोगों को मैसेज मिलता है कि “आपका गैस बिल बाकी है। आज ही भुगतान नहीं किया तो कनेक्शन बंद हो जाएगा।”
डर के कारण लोग तुरंत दिए गए लिंक से भुगतान कर देते हैं और ठगी का शिकार हो जाते हैं।

सोशल मीडिया विज्ञापन के जरिए ठगी

कुछ गिरोह फेसबुक, इंस्टाग्राम या यूट्यूब पर विज्ञापन डालते हैं कि वे तुरंत गैस कनेक्शन या सिलेंडर दिला सकते हैं। लोग पंजीकरण या बुकिंग शुल्क जमा कर देते हैं। लेकिन बाद में ठग संपर्क बंद कर देते हैं।

ऐसे बच सकते हैं साइबर ठगी से –

  • गैस सिलेंडर की बुकिंग केवल आधिकारिक ऐप, वेबसाइट या अधिकृत गैस एजेंसी से ही करें।
  • किसी भी अज्ञात लिंक पर क्लिक न करें।
  • ओटीपी, एटीएम पिन, यूपीआई पिन या बैंक विवरण किसी के साथ साझा न करें।
  • मोबाइल में अनजान ऐप या एपीके फाइल डाउनलोड न करें।
  • किसी अनजान व्यक्ति के कहने पर स्क्रीन शेयरिंग ऐप इंस्टॉल न करें।
  • हेल्पलाइन नंबर हमेशा कंपनी की आधिकारिक वेबसाइट या गैस एजेंसी से ही लें।
  • सोशल मीडिया या व्हाट्सएप पर आने वाले ऑफर और विज्ञापनों पर भरोसा न करें।
  • किसी नए या अनजान डिस्ट्रीब्यूटर से संपर्क करके गैस सिलेंडर न लें। हमेशा अपने पंजीकृत और अधिकृत गैस डिस्ट्रीब्यूटर से ही सिलेंडर बुक कराएं।

उपभोक्ताओं की सहायता के लिए हेल्पलाइन नंबर जारी

गैस उपभोक्ताओं की सुविधा के लिए हेल्पलाइन नंबर 181, 112 तथा उपभोक्ता मामलात विभाग का हेल्पलाइन नंबर 14435 जारी किया गया है। इन नंबरों पर संपर्क कर उपभोक्ता गैस आपूर्ति से जुड़ी समस्याओं और शिकायतों को दर्ज करवा सकते हैं।

यदि कोई उपभोक्ता डीडवाना-कुचामन जिले में रहता है तो वह कलक्टर कार्यालय के कंट्रोल रूम नंबर 01580-294494 पर भी संपर्क कर सकता है।

इसके अलावा साइबर ठगी की स्थिति में तुरंत राष्ट्रीय साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज करवाई जा सकती है।

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