Saturday, March 7, 2026
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डीडवाना-कुचामन दौरे पर मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा, लाडनूं में जैन विश्व भारती के लोकार्पण समारोह में शिरकत

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डीडवाना. लाडनूं स्थित जैन विश्व भारती परिसर में नवनिर्मित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल के लोकार्पण अवसर पर एक भव्य धार्मिक एवं सांस्कृतिक कार्यक्रम का आयोजन किया गया। इस कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा सहित जनप्रतिनिधियों, धर्माचार्यों एवं बड़ी संख्या में श्रद्धालुओं की उपस्थिति रही। 

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कार्यक्रम में मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने कहा कि जैन धर्म केवल एक धर्म नहीं, बल्कि जीवन जीने की एक पूर्ण कला है। इस धर्म के पंच महाव्रत आज के भौतिकवादी युग में भी उतने ही प्रासंगिक हैं जितने सदियों पहले थे। उन्होंने कहा कि संत, मुनि, महंत समाज को दिशा देने का काम करते हैं तथा हमारी समृद्ध संस्कृति को दुनियाभर में पहुंचाते हैं। उन्होंने कहा कि राज्य सरकार का उद्देश्य है कि राजस्थान की सांस्कृतिक विरासत को संरक्षित रखते हुए उसे नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए।

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शर्मा शुक्रवार को लाडनूं के जैन विश्व भारती परिसर में आयोजित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल के लोकार्पण समारोह को संबोधित कर रहे थे। उन्होंने कहा कि पूज्य आचार्य महाश्रमण का पधारना राजस्थान के लिए अत्यंत सम्मान और गौरव का विषय है। जैन विश्व भारती द्वारा आयोजित इस भव्य कार्यक्रम में सुधर्मा सभा का लोकार्पण भी हो रहा है। यह आने वाले समय में मानवीय मूल्यों और धार्मिक शिक्षा का एक प्रमुख केंद्र बनेगा।

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जैन धर्म द्वारा अहिंसा के संदेश ने मानवता को दिखाई दिशा

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन धर्म अहिंसा का संदेश देकर प्रकाश स्तंभ की तरह मानवता को दिशा दिखा रहा है। जैन दर्शन ने ‘जियो और जीने दो’ का जो मूलमंत्र दिया है। वह आज पर्यावरण संरक्षण का सबसे बड़ा आधार बन चुका है। उन्होंने कहा कि इस धर्म की यह विशेषता रही है कि इसने हमेशा प्रकृति के साथ संतुलन बनाकर चलने की शिक्षा दी है। आज जब पूरी दुनिया जलवायु परिवर्तन से चिंतित है। तब जैन धर्म के सिद्धांत हमें यह बताते हैं कि संयम और सादगी के बिना मानवता का भविष्य सुरक्षित नहीं हो सकता।

पूज्य आचार्य महाश्रमण लाखों लोगों के लिए प्रेरणास्रोत

सीएम शर्मा ने कहा कि पूज्य आचार्य महाश्रमण मानवीय मूल्यों के जीवंत प्रतीक हैं। इनकी साधना, ज्ञान और त्याग लाखों लोगों के लिए प्रेरणा का स्रोत है। इन्होंने अपना संपूर्ण जीवन मानव कल्याण और धर्म प्रचार के लिए समर्पित कर दिया है।

उन्होंने कहा कि आचार्य ने जैन धर्म की प्राचीन परंपराओं को आधुनिक समय के साथ जोड़कर एक नई दिशा दी है। उनका यह योगदान केवल जैन समाज के लिए नहीं, बल्कि संपूर्ण मानवता के लिए वरदान है। उनकी शिक्षाओं में जो सरलता और व्यावहारिकता है, वह हर वर्ग के लोगों तक पहुँचती है।

जैन विश्व भारती ने विभिन्न क्षेत्रों में दिया अविस्मरणीय योगदान

मुख्यमंत्री ने कहा कि जैन विश्व भारती ने पिछले कई दशकों में धर्म, शिक्षा और समाज सेवा के क्षेत्र में अविस्मरणीय योगदान दिया है। आचार्य तुलसी के बाद आचार्य महाप्रज्ञ ने इस परंपरा को आगे बढ़ाया। उन्होंने कहा कि इस संस्थान ने जैन दर्शन के प्रचार-प्रसार के साथ ही आधुनिक शिक्षा को मानवीय मूल्यों के साथ जोड़कर एक नई दिशा दी है। यहाँ संचालित शिक्षण संस्थानों में विद्यार्थियों को केवल किताबी ज्ञान के साथ जीवन जीने की कला भी सिखाई जाती है। विश्व भारती ने अहिंसा और शांति के संदेश को घर-घर तक पहुँचाने का काम किया है।

यह संस्थान विदेशों में भी भारतीय संस्कृति और जैन दर्शन का प्रतिनिधित्व कर रहा है। उन्होंने कहा कि सुधर्मा सभा मानवीय मूल्यों का एक मंदिर है। यहाँ से सत्य, अहिंसा और करुणा का संदेश दूर-दूर तक फैलेगा।

इस दौरान शर्मा ने आचार्य महाश्रमण से आशीर्वचन प्राप्त किए। शर्मा ने जैन विश्व भारती में नवनिर्मित सुधर्मा सभा प्रवचन हॉल का लोकार्पण किया। इस अवसर पर साध्वी प्रमुखा विश्रुत विभा, मुनि महावीर कुमार, साध्वी वर्या सम्बुद्ध यशा, राजस्थान पत्रिका समूह के प्रधान संपादक गुलाब कोठारी, जैन विश्व भारती के अध्यक्ष अमरचंद लुंकड़ सहित जैन मुनि-साध्वी, जैन विश्व भारती के पदाधिकारीगण एवं बड़ी संख्या में आमजन मौजूद रहे।

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