कुचामन सिटी. भारत-अमेरिका के बीच प्रस्तावित खाद्य पदार्थ आयात डील के विरोध में राष्ट्रीय किसान महासभा ने तीखा विरोध दर्ज कराते हुए महामहिम राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू के नाम तहसीलदार के माध्यम से ज्ञापन सौंपा। संगठन ने इस समझौते को किसान विरोधी बताते हुए इसे तत्काल प्रभाव से निरस्त करने की मांग की है।


ज्ञापन सौंपते हुए संगठन के नेताओं ने कहा कि यह डील देश की कृषि व्यवस्था, किसानों की आजीविका और खाद्य आत्मनिर्भरता पर सीधा हमला है। उनका कहना है कि यदि विदेशी कृषि उत्पादों का अनियंत्रित आयात हुआ तो भारतीय किसानों को अपनी उपज का उचित मूल्य नहीं मिल पाएगा और कृषि संकट और गहरा जाएगा।

किसानों को बर्बाद करने वाला कोई भी समझौता स्वीकार नहीं – परसाराम बुगालिया
किसान नेता परसाराम बुगालिया ने कहा कि भारत का किसान पहले ही लागत, मौसम और बाजार की मार झेल रहा है। ऐसे समय में विदेशी खाद्य पदार्थों को देश में लाना किसानों को बर्बाद करने जैसा है। भारत को विदेशी कंपनियों का बाजार नहीं बनने दिया जाएगा। यदि सरकार ने यह निर्णय वापस नहीं लिया तो किसान सड़कों पर उतरने को मजबूर होंगे। उन्होंने कहा कि किसानों की अनदेखी कर किए गए किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को देश का अन्नदाता स्वीकार नहीं करेगा।
देश को डंपिंग ग्राउंड बनाने की साजिश – गंगाराम कुड़ी
जिला अध्यक्ष गंगाराम कुड़ी ने कहा कि अमेरिका सहित अन्य देशों से आने वाले जीएमओ (GMO) और रासायनिक खाद्य पदार्थ भारत की कृषि और जनता के स्वास्थ्य दोनों के लिए खतरा हैं। यह देश को डंपिंग ग्राउंड बनाने की साजिश है, जिसे किसी भी कीमत पर सफल नहीं होने दिया जाएगा। उन्होंने विदेशी कृषि उत्पादों पर भारी आयात शुल्क लगाने और देशी किसानों को संरक्षण देने की मांग की।

एमएसपी की कानूनी गारंटी ही किसानों का सुरक्षा कवच – मुनाराम महला
जिला सचिव मुनाराम महला ने कहा कि जब तक किसानों को स्वामीनाथन आयोग की सिफारिश के अनुसार C2+50% पर एमएसपी की कानूनी गारंटी नहीं मिलेगी, तब तक किसान आर्थिक रूप से सुरक्षित नहीं हो सकता। सरकार को पहले देश के किसानों को मजबूत करना चाहिए, न कि विदेशी उत्पादों को बढ़ावा देना चाहिए।
राष्ट्रीय किसान महासभा ने मांग की है कि कृषि एवं खाद्य व्यापार से जुड़े किसी भी अंतरराष्ट्रीय समझौते को संसद में सार्वजनिक चर्चा और किसानों की सहमति के बाद ही लागू किया जाए।
आंदोलन की चेतावनी – संगठन ने स्पष्ट चेतावनी दी है कि यदि किसानों की मांगों पर शीघ्र निर्णय नहीं लिया गया तो देशभर में व्यापक लेकिन शांतिपूर्ण आंदोलन किया जाएगा, जिसकी संपूर्ण जिम्मेदारी सरकार की होगी।
ज्ञापन के माध्यम से संगठन ने महामहिम राष्ट्रपति से हस्तक्षेप कर किसानों के अधिकारों, सम्मान और देश की खाद्य संप्रभुता की रक्षा करने की अपील की है।
इस मौके पर किसान नेता परसाराम बुगालिया, जिला अध्यक्ष गंगाराम कुड़ी, जिला संयोजक प्रहलाद मुंड, जिला सचिव मुनाराम महला, युवा नेता कमलकांत डोडवाडिया, तहसील उपाध्यक्ष मेघाराम कसवा, जिला उपाध्यक्ष नानूराम भींचर, तहसील सचिव नरेंद्र कुमार बुगालिया, तहसील संयोजक बजरंग लाल मूड, तहसील सचिव सुरेश कुमार लोरा, पार्षद फारुक टाक सहित राष्ट्रीय किसान महासभा के कार्यकर्ता उपस्थित रहे।
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