Tuesday, February 10, 2026
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कुचामन सिटी: विशाल कलश शोभा यात्रा के साथ शहर में हिंदू सम्मेलन संपन्न

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कुचामन सिटी. हिंदू सम्मेलन आयोजन समिति, प्रताप बस्ती कुचामन के संयोजक राजकुमार सिंघाटिया ने बताया कि समिति की ओर से रविवार को विशाल कलश शोभा यात्रा के साथ हिंदू सम्मेलन का आयोजन किया गया।

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कार्यक्रम की शुरुआत गौरीशंकर मंदिर गौशाला से हुई। जहां से लगभग 500 से अधिक मातृशक्ति ने कलश यात्रा निकाली।

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कलश शोभा यात्रा में बैंड-बाजों के साथ हिंदू संस्कृति से जुड़ी आकर्षक झांकियां प्रस्तुत की गईं। भारत माता, रानी लक्ष्मीबाई, अहिल्याबाई होलकर और मीराबाई की झांकियां विशेष आकर्षण का केंद्र रहीं। जो घोड़ों पर सवार होकर कार्यक्रम स्थल तक पहुंचीं। नगर के सभी जाति व समुदाय के लोग हर्षोल्लास के साथ कार्यक्रम में सहभागी बने।

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सम्मेलन में मंचासीन संत मौनी बाबा और संत भगवान दास सहित वक्ता पीयूष दवे तथा नैना बागड़ा ने उपस्थित जनसमुदाय को संबोधित किया। वक्ताओं ने संगठित हिंदू समाज, सामाजिक समरसता, नारी उत्थान तथा जातिगत भेदभाव को समाप्त कर एक सशक्त और एकजुट समाज के निर्माण का आह्वान किया।

कार्यक्रम के पश्चात भारत माता की आरती तथा महाप्रसादी का आयोजन किया गया। जिसमें हजारों की संख्या में श्रद्धालु एवं नागरिक उपस्थित रहे। पूरे आयोजन में श्रद्धा, अनुशासन और सांस्कृतिक एकता का अद्भुत दृश्य देखने को मिला।

एक रहेंगे तो सुरक्षित रहेंगे – मौनी बाबा

मौनी बाबा ने अपने उद्बोधन में सनातन धर्म एवं हिंदू सभ्यता-संस्कृति की विशेषताओं पर प्रकाश डालते हुए वर्तमान सामाजिक चुनौतियों का उल्लेख किया। उन्होंने कहा कि समाज की एकता ही हर समस्या का समाधान है। उनके अनुसार एकजुट रहकर ही राष्ट्र और संस्कृति की रक्षा संभव है।

संत भगवान दास ने धर्म का अर्थ स्पष्ट करते हुए कहा कि जो धारण किया जाए वही धर्म है। उन्होंने युग धर्म के अनुरूप आचरण करने, ऋषि-मुनियों एवं पूर्वजों की परंपराओं से प्रेरणा लेने तथा आने वाली पीढ़ी को श्रेष्ठ संस्कार देने पर जोर दिया।

संगठित समाज से सशक्त भारत की कल्पना – पीयूष दवे

मुख्य वक्ता पीयूष दवे ने कहा कि सनातन धर्म और हिंदू सभ्यता विश्व की सबसे प्राचीन संस्कृति है। जो आदि-अनादि काल से चली आ रही है।

उन्होंने बताया कि इतिहास में अनेक आघातों के बावजूद इस संस्कृति की जड़ें मजबूत बनी रहीं। संघ के शताब्दी वर्ष का उल्लेख करते हुए उन्होंने सामाजिक समरसता, कुटुंब प्रबोधन, पर्यावरण संरक्षण, नागरिक शिष्टाचार और स्वदेशी जैसे विषयों पर विस्तार से विचार रखे। उन्होंने जाति-पात, ऊंच-नीच और भेदभाव से ऊपर उठकर समाज को एक मंच पर लाने तथा संगठित हिंदू और समर्थ भारत के निर्माण का आह्वान किया।

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