कुचामन सिटी. गर्भस्थ शिशु संरक्षण समिति भारत कुचामन शाखा के तत्वावधान में कुचामन महाविद्यालय में गीता जयंती महोत्सव का भव्य और गरिमामय आयोजन सम्पन्न हुआ।


कार्यक्रम में संत योगी रमणनाथ महाराज (सांभरलेक) तथा समिति के राष्ट्रीय कार्यकारी अध्यक्ष श्यामसुंदर मंत्री मुख्य अतिथि के रूप में उपस्थित रहे।

मुख्य वक्ता संत योगी रमणनाथ महाराज ने महाभारत के प्रेरक दृष्टान्तों के माध्यम से श्रीमद्भगवद्गीता के जीवन-दर्शन पर प्रकाश डालते हुए कहा कि गीता हर संकट का समाधान देने वाली सर्वोत्तम मार्गदर्शिका है।


उन्होंने युवाओं को संस्कारयुक्त दिनचर्या अपनाने, आत्मबल बढ़ाने और सत्यनिष्ठ आचरण की प्रेरणा दी। उन्होंने कहा कि कठिन परिस्थितियों में गीता का ज्ञान मन को स्थिर रखकर सही निर्णय लेने की शक्ति प्रदान करता है।
मुख्य अतिथि श्यामसुंदर मंत्री ने गीता को भारत एवं विश्व की अमूल्य विरासत बताते हुए कहा कि श्रीमद्भगवद्गीता मनुष्य को आनंदमय, संतुलित और आदर्श जीवन जीने की कला सिखाती है। उन्होंने युवाओं से आह्वान किया कि वे गीता के उपदेशों को जीवन में आत्मसात कर मजबूत चरित्र निर्माण की दिशा में आगे बढ़ें।
कुचामन इकाई प्रभारी सत्यप्रकाश शर्मा ने समिति के उद्देश्यों, संस्कार निर्माण की आवश्यकता तथा गीता जयंती महोत्सव की पृष्ठभूमि पर प्रकाश डाला। उन्होंने कहा कि गीता मानव जीवन को धर्म, कर्तव्य और सद्पथ की ओर मार्गदर्शन देने वाला दिव्य ग्रंथ है।
कार्यक्रम के अंतर्गत महाविद्यालय के विद्यार्थियों के लिए गीता ज्ञान प्रश्नोत्तरी आयोजित की गई, जिसमें 71 विद्यार्थियों ने भाग लिया।
परिणाम इस प्रकार रहे –
- प्रथम: दीक्षा सैन (बीसीए पंचम सेमेस्टर)
- द्वितीय: अनुराधा (बीसीए पंचम सेमेस्टर)
- तृतीय: मनदीप (बीसीए प्रथम सेमेस्टर)
- सांत्वना पुरस्कार: धीरेन्द्र शर्मा (बीसीए प्रथम सेमेस्टर)
समिति द्वारा सभी विजेताओं को सम्मानित किया जाएगा।
कार्यक्रम में गीता पर सस्वर श्लोक पठन एवं व्याख्या हेतु तेजस्विनी शर्मा को दुपट्टा ओढ़ाकर विशेष सम्मान प्रदान किया गया।
इस अवसर पर वरिष्ठ साधक सत्यनारायण मोर, अनन्त तिवाड़ी, भानुप्रकाश औदिच्य, महाविद्यालय के प्राचार्य पूरण सिंह गुर्जर, महेन्द्र कुमार मिश्रा, तेजस्विनी शर्मा, महाविद्यालय स्टाफ तथा बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। सभी ने गीता संदेशों से प्रेरित होकर संस्कार, सदाचार एवं मानव कल्याण की भावना से कार्य करने का संकल्प लिया।






