मकराना क्षेत्र के एक मामले में अदालत ने फैसला सुनाते हुए पुलिस द्वारा प्रस्तुत फाइनल रिपोर्ट (एफ.आर.) को अस्वीकार कर दिया है। अदालत ने परिवादी राधेश्याम गौड़ की ओर से दायर प्रोटेस्ट पिटीशन को आंशिक रूप से स्वीकार करते हुए तत्कालीन सरपंच दिलीप सिंह के खिलाफ धारा 323 व 504 आईपीसी में प्रसंज्ञान लिया है।


ग्राम पंचायत गैलासर में पीड़ित से की थी मारपीट
अदालत में सुनवाई के दौरान परिवादी की ओर से कहा गया कि घटना 16 नवंबर 2021 की है। जब राधेश्याम अपने भाई रामस्वरूप और भतीजे निर्मल शर्मा के साथ ग्राम पंचायत गैलासर में पट्टा संबंधी दस्तावेज जमा करवाने गया था।

आरोप है कि उस समय सरपंच दिलीप सिंह ने उनके कागजात फाड़ दिए, गाली-गलौच की और धक्का-मुक्की करते हुए मारपीट की। राधेश्याम ने यह भी आरोप लगाया कि उसकी जेब से 5,000 रुपए निकाल लिए गए।
राधेश्याम का कहना था कि उसने घटना के तुरंत बाद 18 नवंबर 2021 को मकराना थाने में रिपोर्ट देनी चाही लेकिन रिपोर्ट दर्ज नहीं की गई। जिसके बाद उसने 25 दिसंबर 2021 को एसपी नागौर को शिकायत भेजी। इस आधार पर पुलिस का रिपोर्ट में देरी का तर्क अदालत ने स्वीकार नहीं किया।

अदालत ने पत्रावली में मौजूद चोट प्रतिवेदन, चिकित्सकीय परामर्श, तथा प्रोटेस्ट पिटीशन में प्रस्तुत राधेश्याम, रामस्वरूप और निर्मल शर्मा की गवाही को विश्वसनीय माना।
कोर्ट बोला – घटना को नकारा नहीं जा सकता
अदालत ने कहा कि गवाहों ने घटना के दिन तीनों व्यक्तियों की पंचायत कार्यालय में उपस्थिति की पुष्टि की है। पुलिस ने जिन अन्य गवाहों के बयान लिए, उन्होंने घटना से इनकार तो किया लेकिन परिवादी की पंचायत में मौजूदगी स्वीकार की। जिससे घटना की संभावना को नकारा नहीं जा सकता।
हालांकि जेब से पैसे छीनने के आरोप को लेकर पर्याप्त साक्ष्य नहीं मिले, लेकिन अदालत ने माना कि मारपीट और गाली-गलौच के आरोप प्रथम दृष्टया साबित होते हैं। इसलिए अदालत ने पुलिस की नकारात्मक रिपोर्ट को खारिज करते हुए अभियुक्त दिलीप सिंह के खिलाफ मुकदमा आगे बढ़ाने का आदेश दिया।
अब अदालत ने मामले की केस डायरी पुनः पुलिस को भेजने तथा विधि अनुसार आगे की कार्रवाई करने का निर्देश दिया है। अभियुक्त को समन तलब करने की प्रक्रिया धारा 204 सीआरपीसी के पालन के बाद शुरू की जाएगी।
राजेश कुमावत बने नावां बार संघ के अध्यक्ष, अभिभाषक संघ चुनाव संपन्न






