मकराना-मंगलाना रोड पर स्थित टोल प्लाजा शनिवार को अचानक बंद कर दिया गया। टोल संचालक कंपनी का कहना है कि स्थानीय वाहनों को छूट देने के समझौते के कारण उन्हें प्रतिदिन भारी आर्थिक नुकसान हो रहा था, जिसे देखते हुए यह कदम उठाया गया।


टोल प्रबंधक शंकर चौधरी ने बताया कि पीडब्ल्यूडी ने आरडी देवंदा कंपनी को इस टोल प्लाजा के संचालन का ठेका एक वर्ष के लिए प्रतिदिन 1 लाख 10 हजार रुपए के हिसाब से दिया था। टोल हाल ही में शुरू हुआ था। शुरूआत में मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत, परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया और स्थानीय लोगों ने टोल का विरोध किया। इसके बाद 10 किलोमीटर की सीमा के भीतर आने वाले वाहनों को टोल मुक्त करने और कंपनी को हर्जाना देने का समझौता किया गया।

कंपनी को हुआ घाटा
चौधरी ने बताया कि स्थानीय वाहनों को छूट देने के कारण कंपनी की आय पर गंभीर असर पड़ा। अक्टूबर माह में ही कंपनी को लगभग 22 लाख रुपए का नुकसान हुआ। रोजाना 70 से 80 हजार रुपए का घाटा सहन करना संभव नहीं था। इस वजह से कंपनी ने अपने उच्च अधिकारियों के निर्देशानुसार शनिवार सुबह टोल कर्मचारियों से बैरिकेडिंग हटा कर टोल प्लाजा बंद करने को कहा।
टोल प्लाजा बंद होने पर मकराना विधायक का बयान
मकराना विधायक जाकिर हुसैन गैसावत ने कहा कि मकराना-परबतसर क्षेत्र के लोगों की जीत हुई है। मकराना से बोरावड़ और परबतसर के किनसरिया तक लगे नियम-विरुद्ध टोल को जनता और ग्रामीणों के दबाव से हटाया गया। टोल 26 जुलाई को चालू हुआ था, जिस पर मैं, परबतसर विधायक रामनिवास गावड़िया, मकराना के जनप्रतिनिधि और ग्रामीण दो दिन धरने पर बैठे।

कलक्टर और जयपुर के उच्च अधिकारियों की मीटिंग में निर्णय हुआ कि मकराना के आसपास की छोटी गाड़ियों का टोल फ्री होगा, केवल कमर्शियल गाड़ियों से टोल लिया जाएगा। ठेकेदार ने कहा कि उन्हें मंथली कंपेंसेशन नहीं मिला, इसलिए वे घाटे में थे, और अंततः उन्होंने अपना सामान ले जाकर टोल हटाया।
मैंने विधानसभा में भी इस नियम-विरुद्ध टोल के खिलाफ प्रश्न उठाए। कुल 140 करोड़ रुपए खर्च हुए थे, जबकि मकराना-परबतसर क्षेत्र में पहले से रेवेन्यू आता है। हमारी मांग यही रही कि आसपास की छोटी गाड़ियों का टोल नहीं लगे।
यदि भविष्य में कोई नया ठेकेदार टोल लगाएगा, हमारी यही शर्त रहेगी कि 20 किलोमीटर के दायरे में छोटी गाड़ियों का टोल फ्री होगा।






