मकराना: राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय भैंया कलां में देवउठनी एकादशी के अवसर पर सुप्रसिद्ध कथक गुरु सुबोध कुमार शर्मा ने विद्यार्थियों को संगीत की विभिन्न कलाओं की जानकारी दी।


उन्होंने बताया कि संगीत मानव जीवन का अभिन्न अंग है, जो तन, मन और आत्मा को एकाग्र करता है।

सुबोध कुमार शर्मा ने संगीत के तीन मुख्य भाग — गायन, वादन और नृत्य — की विस्तृत जानकारी देते हुए कहा कि लोक नृत्य और शास्त्रीय नृत्य भारतीय संस्कृति की आत्मा हैं। उन्होंने विद्यार्थियों को संगीत के सैद्धांतिक व प्रायोगिक पक्षों से अवगत कराया तथा बताया कि संगीत में अकादमिक रूप से करियर बनाना आज भी एक उज्ज्वल विकल्प है।
89 वर्ष की आयु में भी पूरी तरह स्वस्थ सुबोध कुमार शर्मा ने कहा कि उनका मिशन है कि धीरे-धीरे लुप्त होती भारतीय शास्त्रीय संगीत की विधा को नई पीढ़ी तक पहुंचाया जाए। उन्होंने कहा कि “संगीत वह साधना है जिसमें योग, व्यायाम और आसन एक साथ साधे जा सकते हैं।”

वे ग्रामीण क्षेत्रों में भी रुचि रखने वाले विद्यार्थियों को प्रायोगिक कक्षाओं के माध्यम से संगीत का लाभ पहुंचा रहे हैं।
इस अवसर पर विद्यालय के प्रधानाचार्य राजेन्द्र प्रसाद पारीक सहित विद्यालय परिवार के सदस्य हरिराम, निम्बाराम, नेमादेवी, श्यामा शर्मा, संगीता, सुमन, विक्रम सिंह, जगदीश प्रसाद, रमेश चंद, श्रीराम, भंवरलाल, भंवरुराम, रामलाल, जितेन्द्र मुवाल, रामनिवास, राजाराम और प्रेमप्रकाश आदि ने सुबोध कुमार शर्मा का राजस्थानी परंपरा के अनुसार शानदार स्वागत किया।
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