नावां सिटी. राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ की स्थापना के 100 वर्ष पूरे होने पर नावां में रविवार को लगभग दो हजार से अधिक स्वयंसेवकों द्वारा द्विधारा पथ संचलन निकाला गया।


शहर के जोगियों के आसन स्थित राधा–कृष्ण भगवान के मंदिर से माधव धारा पथ संचलन तथा गंगा सागर रोड पर गोविंद मारवाल के मकान से केशव धारा पथ संचलन रवाना हुआ।

मार्ग में लोगों ने पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का स्वागत किया। पथ संचलन की द्विधाराओं का भव्य संगम शहर के पुराने बस स्टैंड पर महालक्ष्मी होटल के सामने हुआ। यह दिन शहर के लिए ऐतिहासिक रहा। पूरा शहर घोष की धुन और स्वयंसेवकों की कदमताल से गूंज उठा। राजस्थान सरकार के राजस्व राज्य मंत्री विजयसिंह चौधरी ने भी पथ संचलन में भाग लिया।


खंड कार्यवाह युगानन्द ने बताया कि संचलन दो धाराओं केशव धारा और माधव धारा के रूप में निकला। केशव धारा महावीर बस्ती, गंगा सागर से और माधव धारा राधा–कृष्ण बस्ती, आसन से प्रारंभ हुई। दोनों धाराओं का भव्य संगम महालक्ष्मी चौराह पर हुआ। देखकर ऐसा लग रहा था कि दो समुद्र धाराएं एक साथ विलय हो रही हों।
मार्ग में जगह-जगह भव्य रंगोली और माता–बहिनें थाली लिए उपस्थित थीं। शहरवासियों ने 101 स्वागत द्वार और ग्यारह क्विंटल पुष्प वर्षा कर स्वयंसेवकों का भव्य स्वागत किया। चारों ओर विजय शंखनाद और जयकारे गूंजते रहे।
द्विधारा पथ संचलन में निंबार्क पीठ के पीठाधीश्वर जगतगुरु श्याम शरण देवाचार्य श्रीजी महाराज का भी आगमन हुआ। महाराजश्री लाल बहादुर शास्त्री स्टेडियम में पहुंचे और स्वयंसेवकों को आशीर्वचन दिए।
संघ शताब्दी वर्ष के अवसर पर स्वयंसेवकों ने समाज परिवर्तन के लिए कार्य करने का संकल्प लिया। उन्होंने परिवार में संस्कार, संवाद और एकता को मजबूत करने, समाज में भेदभाव मिटाने, प्रकृति और पर्यावरण की रक्षा करने, अनुशासन, शालीनता और जिम्मेदार नागरिकता विकसित करने और देशी उत्पादों का उपयोग बढ़ाकर आत्मनिर्भर भारत में योगदान देने का संकल्प लिया। इस अवसर पर अनेक गणमान्य नागरिक, स्वयंसेवक और स्थानीय लोग उपस्थित रहे।
जोधपुर प्रांत के बौद्धिक प्रमुख शंभू सिंह ने संघ के 100 वर्ष के दौरान राष्ट्रहित में किए गए कार्यों का उल्लेख किया।
उन्होंने बताया कि अक्टूबर 1947 में संघ के स्वयंसेवकों ने कश्मीर सीमा पर पाकिस्तानी सेना की गतिविधियों पर निगरानी रखी और मातृभूमि की रक्षा में अपने प्राण न्योछावर किए। 1962 के युद्ध में संघ के स्वयंसेवक सेना की सहायता के लिए सीमा पर पहुंचे और जवानों की मदद, रसद और आपूर्ति में योगदान दिया।
26 जनवरी 1963 की परेड में प्रधानमंत्री जवाहरलाल नेहरू ने स्वयंसेवकों को शामिल होने का न्योता दिया, और स्वयंसेवक कदम से कदम मिलाकर परेड में शामिल हुए।
संघ ने दादरा, नगर हवेली और गोवा के भारत में विलय में भी निर्णायक भूमिका निभाई। 21 जुलाई 1954 को दादरा पुर्तगालियों से मुक्त कराया गया, 28 जुलाई को नरोली और फिपारिया मुक्त कराए गए, और फिर सिलवासा राजधानी के रूप में मुक्त हुआ। संघ के स्वयंसेवकों ने पुर्तगाल का झंडा उतारकर भारत का तिरंगा फहराया और पूरा दादरा–नगर हवेली भारत सरकार को सौंपा।
ऐसे अनेक राष्ट्रहित के कार्य संघ द्वारा किए गए। आज देश में सबसे बड़े सेवा कार्य संघ कर रहा है। संघ शताब्दी वर्ष के नाते पांच कार्यों से समाज परिवर्तन की ओर बढ़ रहा है।






