Sunday, July 12, 2026
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डीडवाना-कुचामन: 21 हजार का इनामी मास्टरमाइंड गिरफ्तार, NSP पोर्टल हैक कर करोड़ों की छात्रवृत्ति ठगी का खुलासा

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डीडवाना-कुचामन पुलिस ने भारत सरकार के नेशनल स्कॉलरशिप पोर्टल (NSP) से अल्पसंख्यक छात्रों की छात्रवृत्ति में करोड़ों रुपए की ठगी करने वाले अंतरराज्यीय साइबर गिरोह के मुख्य सरगना इमरान अली उर्फ सरजू को गिरफ्तार कर बड़ी सफलता हासिल की है।

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आरोपी पर जिला पुलिस अधीक्षक द्वारा 21 हजार रुपए का इनाम घोषित था।

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पुलिस के अनुसार – वर्ष 2021-22 और 2022-23 में केन्द्र सरकार द्वारा अल्पसंख्यक छात्रों के लिए जारी की गई छात्रवृत्ति योजना में NSP पोर्टल से छेड़छाड़ कर करोड़ों रुपए की धोखाधड़ी की गई थी। मामले के सामने आने के बाद अल्पसंख्यक कार्य मंत्रालय, भारत सरकार के निर्देश पर राजस्थान में विभिन्न जिलों में करीब 28 मामले दर्ज किए गए, जिनमें डीडवाना, नावां और मकराना भी शामिल हैं।

पहले भी पकड़े जा चुके हैं गैंग के सदस्य

इस प्रकरण में पुलिस पहले ही पश्चिम बंगाल से जुबेर आलम, मंसूर आलम और एमडी मुन्ना मुस्ताक को गिरफ्तार कर चुकी है। लंबे समय से फरार चल रहे मुख्य सरगना इमरान अली उर्फ सरजू की तलाश बिहार, पश्चिम बंगाल, दरभंगा और लखनऊ सहित कई राज्यों में की गई।

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वेश बदलकर बांग्लादेश बॉर्डर तक पहुंची पुलिस टीम

आरोपी तक पहुंचने के लिए पुलिस टीम ने महीनों तक वेश बदलकर चाय बागानों और बांग्लादेश सीमा से लगे गांवों में खानाबदोशों की तरह रहकर रेकी की। तकनीकी जांच, बैंक खातों की पड़ताल और लगातार फील्ड ऑपरेशन के बाद पुलिस गिरोह तक पहुंचने में सफल रही।

आरोपी के घर से भारी मात्रा में फर्जी दस्तावेज और उपकरण बरामद

आरोपी इमरान अली उर्फ सरजू (30) निवासी थाना चोपड़ा पश्चिम बंगाल के घर और कब्जे से पुलिस ने बड़ी मात्रा में आपत्तिजनक सामग्री बरामद की है।

इनमें 18 शिक्षण संस्थानों की फर्जी मुहरें, 105 मोबाइल सिम कार्ड, विभिन्न शिक्षण संस्थानों की 1 करोड़ 58 लाख 970 रुपए की फर्जी रसीदें, 4 क्लोन अंगूठा निशान, फिंगरप्रिंट मशीन, मेड इन चाइना मोबाइल पेमेंट टर्मिनल, कैमरे, चार्जर, चार सिम सपोर्ट वाला Green Beri G5000 मोबाइल, ठगी के 44 हजार रुपये नकद, 4 मोबाइल फोन, बैंक पासबुक, 7 एटीएम कार्ड तथा अन्य सामान शामिल हैं।

पुलिस का मानना है कि इन उपकरणों और दस्तावेजों का उपयोग फर्जी छात्रवृत्ति आवेदन, बैंक खातों के संचालन और ठगी की पूरी प्रक्रिया को अंजाम देने में किया जाता था।

2026 में भी जारी थी ठगी

जांच में सामने आया कि गिरोह वर्तमान में भी सक्रिय था। पुलिस के अनुसार आरोपी इमरान अली उर्फ सरजू के खाते में 4 मार्च 2026 को भी 1 लाख 69 हजार 900 रुपए जमा हुए, जिससे स्पष्ट है कि गिरोह लगातार छात्रवृत्ति राशि की फर्जी निकासी कर रहा था।

ऐसे करता था गिरोह करोड़ों की ठगी

पुलिस जांच में सामने आया कि गिरोह पहले बंद पड़े या KYC नहीं कराने वाले शिक्षण संस्थानों के DISE और संस्थागत कोड हासिल करता था। इसके बाद फर्जी HOI और Nodal Officer बनाकर नकली मोबाइल नंबरों से NSP पोर्टल पर OTP प्राप्त कर संस्थानों की आईडी और पासवर्ड तैयार किए जाते थे।

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इसके बाद गरीब लोगों के बैंक खाते खरीदना, फर्जी खाते खुलवाना, छात्रों के नाम बदलकर नकली लाभार्थी जोड़ना और खरीदे गए बैंक खातों में छात्रवृत्ति की राशि ट्रांसफर कराना गिरोह का तरीका था। राशि आने के बाद CSP केन्द्रों के माध्यम से क्लोन फिंगरप्रिंट और फर्जी आधार का उपयोग कर पैसे निकाल लिए जाते थे। स्थानीय स्तर पर सत्यापन कराने के लिए दलालों की भी मदद ली जाती थी।

विशेष टीम ने निभाई अहम भूमिका

यह कार्रवाई पुलिस अधीक्षक डॉ. प्यारेलाल शिवरान (IPS) के निर्देशन तथा अतिरिक्त पुलिस अधीक्षक हिमांशु शर्मा और विमल सिंह नेहरा के सुपरविजन में की गई। टीम का नेतृत्व आरपीएस जेठू सिंह करनोत ने किया। टीम में सुरेश कुमार, प्रेमचंद अडाणिया और मनोज कुमार खीचड़ सहित अन्य पुलिसकर्मियों ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई।

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