कुचामन सिटी. श्रुत पंचमी जैन धर्म का एक महत्वपूर्ण पर्व है, जो जैन आगमों एवं पवित्र शास्त्रों के प्रति श्रद्धा, सम्मान, संरक्षण तथा कृतज्ञता का संदेश देता है। यह पर्व ज्येष्ठ शुक्ल पंचमी के दिन मनाया जाता है।


श्रुत ज्ञान को जैन धर्म में विशेष महत्व प्राप्त है। यह वह दिव्य प्रकाश है, जो अज्ञान के अंधकार को दूर कर मोक्ष मार्ग को प्रकाशित करता है। श्रुत पंचमी का पर्व समाज को ज्ञान, श्रद्धा और संयम के मार्ग पर चलने की प्रेरणा देता है तथा एकता, प्रेम और धार्मिक जागरूकता को बढ़ावा देता है।

लालचंद पहाड़िया ने बताया कि श्रुत पंचमी महापर्व के अवसर पर कुचामन सिटी स्थित महावीर मंदिर, डीडवाना रोड में प्रातःकाल कलशाभिषेक एवं शांतिधारा का आयोजन किया गया।
इसके पश्चात जिनवाणी माता को श्रद्धापूर्वक सिर पर धारण कर जैन पंचरंगा ध्वज के साथ भव्य शोभायात्रा निकाली गई। शोभायात्रा में बड़ी संख्या में श्रावक-श्राविकाओं ने उत्साहपूर्वक भाग लिया और धर्म के प्रति अपनी आस्था प्रकट की।

शोभायात्रा के उपरांत जिनवाणी माता की विशेष पूजा-अर्चना की गई। इस दौरान श्रद्धालुओं ने जिनवाणी के नियमित स्वाध्याय का संकल्प लेते हुए अर्घ्य समर्पित किए। तत्पश्चात विधि-विधान के साथ जिनवाणी माता को यथास्थान विराजमान किया गया।
अमित पाटोदी के अनुसार कार्यक्रम में चिरंजी लाल, अशोक, भव्य, विमलकुमार पाटोदी, कमलकुमार, महेंद्र, पंकज पहाड़िया, भंवरलाल झांझरी, भागचंद अजमेरा, मनीष गंगवाल, महावीर प्रसाद, माणकचंद काला, सुरेश कुमार, पवन, प्रतीक तथा ननू पांड्या सहित अनेक श्रावक-श्राविकाओं ने भावभक्ति के साथ श्रुत पंचमी महापर्व में सहभागिता निभाई तथा आयोजन को सफल बनाने में सहयोग प्रदान किया।






