कुचामन सिटी. जवाहर राजकीय उच्च माध्यमिक विद्यालय, कुचामन सिटी में आयोजित अंतरराष्ट्रीय सम्मेलन जलवायु परिवर्तन एवं ग्लोबल वार्मिंग: सबसे बड़ा वैश्विक संकट और समाधान में हमारी भूमिका में मुख्य वक्ता डॉ. भंवर लाल गुगड़ (पर्यावरण वैज्ञानिक एवं वरिष्ठ शिक्षाविद्) ने कहा कि यदि हमें मानवता को बचाना है तो पर्यावरण-हितैषी जीवनशैली (Lifestyle with Environment) को अपनाना ही होगा।


डॉ. गुगड़ ने अपने विचार रखते हुए कहा कि भौतिकतावाद के इस युग में विकास की गति तो तेज हुई है। परंतु इसके साथ-साथ प्रकृति के साथ हमारा संतुलन बिगड़ गया है। प्राकृतिक संसाधनों का अंधाधुंध दोहन, जीवाश्म ईंधन का अत्यधिक उपयोग तथा हरितगृह गैसें विशेषकर कार्बन डाइऑक्साइड, मीथेन एवं नाइट्रस ऑक्साइड की बढ़ती मात्रा के कारण ग्लोबल वार्मिंग की समस्या गंभीर होती जा रही है।


वैज्ञानिक आंकड़े, बढ़ता वैश्विक तापमान और भविष्य का गंभीर खतरा
उन्होंने वैज्ञानिक तथ्यों का उल्लेख करते हुए बताया कि 1850 से 2025 तक पृथ्वी के औसत तापमान में लगभग 1.1 डिग्री सेल्सियस की वृद्धि हो चुकी है तथा विश्व के लगभग एक-तिहाई हिमनद (ग्लेशियर) पिघल चुके हैं। यदि यही स्थिति बनी रही तो 2040 तक तापमान 1.5 डिग्री सेल्सियस तथा 21वीं सदी के अंत तक 4 डिग्री सेल्सियस तक बढ़ सकता है।

ऐसी स्थिति में ग्लेशियरों का 70-80 प्रतिशत भाग पिघलने से समुद्र जलस्तर में भारी वृद्धि होगी, जिससे तटीय द्वीप एवं शहर डूब सकते हैं, नदियों में जल की कमी, पेयजल संकट तथा कृषि उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएँ उत्पन्न होंगी, जो मानवता के लिए गंभीर खतरा हैं।
डॉ. गुगड़ ने समाधान की दिशा में सभी से अपील की कि जल संरक्षण को जीवन का अभिन्न अंग बनाया जाए, प्रत्येक व्यक्ति प्रति वर्ष 5-10 पौधे लगाकर उनका संरक्षण करे, जहाँ तक संभव हो पैदल चलें या साइकिल का उपयोग करें, प्लास्टिक का न्यूनतम उपयोग करें अथवा पूर्णतः त्यागें, जीवाश्म ईंधन के स्थान पर सौर एवं पवन ऊर्जा जैसी स्वच्छ ऊर्जा अपनाएँ, पेपरलेस तकनीक, जीरो-वेस्ट नीति तथा जल की एक-एक बूंद का संरक्षण करें।
आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) से आजीविका, शिक्षा और जलवायु विश्लेषण
सम्मेलन के दौरान पश्चिम बंगाल के दार्जिलिंग से आए प्रांजल धार ने एआई टूल्स के माध्यम से आजीविका, कौशल विकास एवं रोजगार के अवसरों पर प्रकाश डाला। वहीं आगरा से आए सौरभ सोनी ने ChatGPT, गूगल जेमिनी सहित विभिन्न एआई टूल्स के शैक्षिक, व्यावसायिक एवं पेशेवर उपयोगों की जानकारी देते हुए इनके संभावित दुरुपयोगों के प्रति भी विद्यार्थियों को सचेत किया।
डॉ. गुगड़ ने भी एआई की सहायता से मौसम एवं जलवायु संबंधी विश्लेषण तथा भविष्य के संभावित खतरों के आकलन की उपयोगिता पर अपने विचार साझा किए।
विद्यालय की प्राचार्या मंजू चौधरी ने इस विश्व-स्तरीय ज्ञानवर्धक कार्यक्रम के सभी वक्ताओं डॉ. भंवर लाल गुगड़, सौरभ सोनी एवं प्रांजल धार के प्रति आभार व्यक्त किया तथा विद्यार्थियों से संयमित, पर्यावरण-अनुकूल एवं तकनीक का विवेकपूर्ण उपयोग करने वाला जीवन अपनाने का आह्वान किया।
इस अवसर पर डॉ. गुगड़ ने उपस्थित छात्र-छात्राओं को पेड़ लगाओ, पर्यावरण बचाओ, पृथ्वी बचाओ, ग्लोबल वार्मिंग हटाओ की शपथ भी दिलाई।
कार्यक्रम में विशिष्ट अतिथि के रूप में शिक्षाविद रामनिवास साहू, प्राचार्य बख्तावर सिंह राजपुरोहित, उपप्राचार्य हाकिम खान, उपप्राचार्य सीमा महरोलिया, राजेश चौधरी, कमल कुमावत, नवरतन बुनकर, मीनाक्षी राठौड़, उमा सारस्वत, मनोरमा व्यास, सुषमा राजावत, जाकिर खान, नेमाराम, एजाज खान, हंसा चौहान सहित अनेक गणमान्य नागरिक, शिक्षकगण एवं बड़ी संख्या में छात्र-छात्राएँ उपस्थित रहे। विद्यार्थियों ने पर्यावरण संरक्षण एवं एआई के समन्वित उपयोग से संबंधित जानकारी प्राप्त कर उत्साह एवं प्रेरणा व्यक्त की।
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