
कुचामन न्यूज: राजस्थान पुलिस की एंटी गैंगस्टर टास्क फोर्स (AGTF) को बड़ी कामयाबी मिली है। लॉरेंस विश्नोई और रोहित गोदारा गैंग के मोस्ट वांटेड सदस्य आदित्य जैन को दुबई से गिरफ्तार कर जयपुर लाया गया है।


26 वर्षीय आदित्य जैन उर्फ टोनी पुत्र जाम्बू कुमार जैन राजस्थान के कुचामन शहर का रहने वाला है।


आदित्य जैन पर अपहरण, बलात्कार, रंगदारी, अवैध हथियार, फर्जी पहचान और जेल में बंद अपराधियों को मोबाइल सप्लाई करवाने जैसे सात संगीन मामले दर्ज हैं।
आदित्य जैन एक सम्पन्न परिवार से ताल्लुक रखने वाला युवक जिसने अपनी पढ़ाई-लिखाई और पारिवारिक माहौल को पीछे छोड़कर अपराध की दुनिया में कदम रखा।
शुरुआती दौर में उसका एक विवाहित महिला से प्रेम संबंध बन गया। जो दो बच्चों की मां थी और जिसका पति मस्क़त (ओमान) में काम करता था। जब रिश्ते की भनक परिवार को लगी तो उन्होंने सख्त पाबंदियां लगा दीं। बाद में महिला के पति ने उसे मस्क़त बुला लिया, लेकिन आदित्य उससे मिलने के लिए दुबई तक जा पहुंचा। हालांकि मस्क़त का वीजा न मिलने के कारण वहीं रुक गया।
यह जानकारी महिला और उसके पति को मिल गई, जिससे तंग आकर नवंबर 2017 में महिला ने भारत लौटने पर कुचामन सिटी थाने में आदित्य पर दुष्कर्म का मामला दर्ज करवा दिया। गिरफ्तारी के बाद उसे परबतसर जेल भेजा गया, जहां उसकी मुलाकात कुख्यात अपराधी रिछपाल जाट से हुई और दोनों ने जेल में ही आपराधिक योजनाएं बनानी शुरू कर दीं। कुछ समय बाद जमानत पर छूटने के बाद आदित्य ने उसी महिला से शादी कर ली, जिसने उस पर पहले केस दर्ज करवाया था।
महिला को पति से तलाक मिल चुका था और उसके बच्चे पति की कस्टडी में थे। इधर, रिछपाल को अजमेर की हाई सिक्योरिटी जेल भेज दिया गया था, लेकिन आदित्य ने अपने नेटवर्क से वहां सिम और मोबाइल पहुंचवाया और खुद का बैंक अकाउंट नंबर भी उसे दे दिया। नवंबर 2018 को रिछपाल ने खुद को पुलिस अधिकारी बताकर व्यापार संघ अध्यक्ष शिवरतन सर्राफ से आदित्य के खाते में पांच लाख रुपए डलवा लिए और दोबारा 6 लाख रुपए और मंगवाए।
जब सर्राफ को ठगी का अहसास हुआ तो पुलिस जांच में आदित्य का नाम सामने आया और उसे फिर गिरफ्तार कर लिया गया। पूछताछ में आदित्य ने कबूला कि पैसे उसके अकाउंट में आए थे और कुछ रकम उसने सरपंच के खाते में ट्रांसफर करवाई थी, जबकि बाकी रकम उसके साथियों ने एटीएम से निकाल ली।
इसके बाद 2018 में जेल में ही उसकी मुलाकात वीरेंद्र चारण से हुई। जिसने उसे रोहित गोदारा और लॉरेंस बिश्नोई गैंग से जोड़ दिया। जब AGTF ने लॉरेंस गैंग के सदस्य अमरजीत बिश्नोई और उसकी पति सुधा कंवर को इटली से गिरफ्तार कर लिया तो लॉरेंस गिरोह को डिब्बा कॉलिंग के लिए नए ऑपरेटर की जरूरत पड़ी, तो वीरेंद्र के कहने पर आदित्य पत्नी के साथ दुबई चला गया और जुलाई 2024 से टूर एंड ट्रैवल्स की आड़ में वहां से गैंग के लिए कॉलिंग ऑपरेशन संभालने लगा।
वह अमीर व्यापारियों की जानकारी इकट्ठा करता था। उनके परिवारों का डाटा जुटाता और फिर सिग्नल या व्हाट्सएप या VOIP कॉल्स (डब्बा कॉलिंग) के जरिए उन्हें धमकाता था।
अगर कोई डरकर पैसे नहीं देता तो गैंग के शार्प शूटर भेजता। गोलीबारी कराता और घटनाओं के वीडियो रिकॉर्ड करवाकर सोशल मीडिया पर वायरल करता जिससे लोगों के मन में दहशत फैले।
वहां से वह गैंग को कंट्रोल करता रहा और नई रणनीतियां बनाता रहा। उसने सोशल मीडिया के ज़रिए कई युवाओं को गैंग से जोड़ा। उन्हें पैसे और विदेश बसाने का लालच देकर क्राइम करवाए और भारत में नेटवर्क फैलाया।
कुचामन के व्यापारियों को मिली धमकी में आदित्य जैन का नाम
कुचामन के व्यापारियों को रोहित गोदारा से करोड़ों रुपये की रंगदारी की जो धमकियां मिली थीं। उस मामले में भी आदित्य जैन का नाम सामने आया था। इस प्रकरण में खान मोहल्ला (कुचामन) निवासी सफीक खान और तीन अन्य आरोपियों को पुलिस ने गिरफ्तार किया था जो फिलहाल जेल में बंद है।
इन्होंने व्यापारियों की निजी जानकारी रोहित गोदारा तक पहुंचाई थी जिससे उन्हें टारगेट किया जा सके। मुख्य आरोपी सफीक खान और रोहित गोदारा के बीच हुई बातचीत की रिकॉर्डिंग सबसे पहले kuchamadi.com न्यूज़ चैनल ने सार्वजनिक की थी–पूरी खबर जानें–कुचामन न्यूज: सफीक खान की रोहित गोदारा से फिरौती की बातचीत आई सामने
फरवरी 2025 में AGTF को इनपुट मिला कि राजस्थान में हो रही रंगदारी और धमकी की घटनाओं में कोई शख्स विदेश से ऑपरेट कर रहा है। जयपुर के चित्रकूट थाने के थानाधिकारी मनीष शर्मा को यह केस सौंपा गया। तकनीकी जांच से पता चला कि यह व्यक्ति कोई और नहीं बल्कि आदित्य जैन है जो दुबई से गैंग चला रहा है।
इसके बाद राजस्थान पुलिस की इंटरपोल विंग ने सीबीआई इंटरपोल से संपर्क किया और उसके खिलाफ रेड कॉर्नर नोटिस जारी कराया गया।
24 मार्च 2025 को UAE सरकार ने भारत को सूचना दी कि आदित्य जैन को दुबई में डिटेन कर लिया गया है। इसके बाद एक सिक्योरिटी मिशन तैयार किया गया जिसमें एएसपी सिद्धांत शर्मा के नेतृत्व में निरीक्षक रविन्द्र प्रताप, सुनील जांगिड़ और हेड कांस्टेबल रमेश कुमार को 31 मार्च को दुबई भेजा गया।
गृह मंत्रालय और विदेश मंत्रालय की सहायता से सभी औपचारिकताएं एक ही दिन में पूरी की गईं। आखिरकार 04 अप्रैल 2025 को आदित्य जैन को भारत लाकर जयपुर में पेश किया गया।

यह गिरफ्तारी इसलिए भी महत्वपूर्ण मानी जा रही है क्योंकि यह पूरी तरह एक अंतरराष्ट्रीय स्तर पर समन्वित ऑपरेशन था जिसमें AGTF, CBI, UAE पुलिस और भारत सरकार के गृह व विदेश मंत्रालयों ने एक साथ मिलकर काम किया। अब पुलिस आदित्य से पूछताछ कर रही है ताकि गैंग के बाकी फरार सदस्यों, विदेशी नेटवर्क और भारत में छुपे गुर्गों की जानकारी मिल सके।
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